रुआबांधा में बनेगा प्रदेश का पहला ‘साथी सुपर बाजार’, किसानों की आय बढ़ेगी और महिलाएं होंगी आत्मनिर्भर-5 एकड़ में होगा निर्माण, सस्ते दर पर मिलेंगे 154 तरह के उत्पाद

किसानों व महिला स्व सहायता समूहों को मिलेगा बड़ा मंच

दुर्ग। छत्तीसगढ़ में जल्द ही आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने वाला एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार की ‘साथी परियोजना’ के तहत प्रदेश का पहला ‘साथी सुपर बाजार’ दुर्ग जिले के रुआबांधा में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम रायपुर ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर को 5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है। साथी बाजार का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, महिला स्व सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाना और केंद्र सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को एक मंच से आम जनता तक पहुँचाना है। यह बाजार पूरी तरह से स्वदेशी उत्पादों के प्रोत्साहन पर केंद्रित होगा।

साथी सुपर बाजार में 154 प्रकार के उत्पाद उपलब्ध रहेंगे, जिनमें कृषि, गृह उपयोगी, स्वास्थ्य, खाद्य एवं अन्य दैनिक आवश्यक वस्तुएँ शामिल होंगी। यहां उत्पादों की बाजार दर से 20 से 30 प्रतिशत तक सस्ती दरों में बिक्री की जाएगी। बाजार परिसर में कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट और चिकित्सा सुविधा की भी व्यवस्था होगी।

महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए दुकानों के आबंटन की निविदा में 10 प्रतिशत आरक्षण और कई नियमों में छूट दी गई है। कार्य तेजी से प्रगति पर है और एक वर्ष के भीतर बाजार के तैयार हो जाने की संभावना जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने बताया कि यह साथी बाजार किसानों, महिला समूहों और आम जनता के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इस परियोजना के संचालन हेतु दुर्ग श्री किसान उत्पादक संगठन का गठन किया गया है, जिसमें नाफेड, चैंबर ऑफ कॉमर्स, कैट एवं स्व सहायता समूहों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।

नाफेड के राष्ट्रीय समन्वयक मनीष शाह ने जानकारी दी कि अब तक 6,500 से अधिक सदस्य संगठन से जुड़ चुके हैं, जिनकी संख्या 10,000 तक बढ़ाई जाएगी, जिसमें 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी। प्रत्येक ग्राम से 20 सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।।संगठन को साथी बाजार की बिक्री से 5 प्रतिशत तक लाभांश मिलेगा, जो सदस्यों में वितरित किया जाएगा। चयनित सदस्य अपने ग्रामों में उत्पादों की मार्केटिंग करेंगे, जिसके लिए उन्हें प्रशिक्षण और प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

साथी सुपर बाजार से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण सामान कम कीमत में उपलब्ध होगा। यह मॉडल प्रदेश में ‘ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण और महिला आत्मनिर्भरता’ का प्रतीक बनने जा रहा है।

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