भारत की सबसे बड़ी जमीन पर कब्जे की जंग ! सुप्रीम कोर्ट और सरकार आमने-सामने : क्या अल्पसंख्यकों की आज़ादी खतरे में..? वक्फ संशोधन पर गरमाई राजनीति…

(वक्फ बाय यूजर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से 7 दिन में मांगा जवाब )

YC न्यूज़ डेस्क । सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बाय यूजर के सिद्धांत को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से 7 दिनों में जवाब दाखिल करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए साफ किया कि वक्फ अधिनियम पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन अब सिर्फ पांच अहम बिंदुओं पर ही बहस होगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से मुख्य बिंदुओं पर सहमति बनाने को भी कहा है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भरोसा दिलाया कि अगली तारीख तक वक्फ बाय यूजर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और न ही कलेक्टर कोई आदेश जारी करेगा। इसके साथ ही धारा 9 और 14 के तहत वक्फ बोर्ड व काउंसिल में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी।

कलेक्टर के अधिकारों को लेकर विवाद-

बिल में वक्फ संपत्तियों के सर्वे और स्वामित्व निर्धारण का अधिकार अब कलेक्टर को दे दिया गया है, जबकि पहले यह वक्फ आयुक्त के पास था। अगर कोई जमीन विवादित होती है, तो कलेक्टर की रिपोर्ट को अंतिम माना जाएगा। हालांकि, अब वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।

क्या है वक्फ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि?-

वक्फ की अवधारणा इस्लामी इतिहास में खलीफा उस्मान के दौर से जुड़ी मानी जाती है, जब उन्होंने अल्लाह के नाम पर पानी की सुविधा वक्फ की थी। आज भी दुनिया के कई इस्लामी देशों जैसे मिस्र, सऊदी अरब, तुर्की, इंडोनेशिया आदि में वक्फ मंत्रालय मौजूद है जो धार्मिक संपत्तियों का प्रबंधन करते हैं।

भारत में वक्फ की स्थिति-

भारत में वक्फ बोर्ड के पास करीब 9.4 लाख एकड़ जमीन है, जो 1.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक की आंकी जाती है। यह सेना और रेलवे के बाद सबसे ज्यादा भूमि स्वामित्व वाला संस्थान है। ऐसे में इस पर उठ रहे कानूनी और संवैधानिक सवालों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला दूरगामी असर डाल सकता है।
वैसे अब इस मामले में सबकी नजरें अगली सुनवाई और केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हैं।

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