
मनीष चंद्राकर /जामगांव आर । दक्षिण पाटन क्षेत्र के टेमरी से बेल्हारी-किकिरमेटा माइनर तक जल संसाधन विभाग द्वारा कराई गई नहर लाइनिंग में भारी अनियमितता उजागर होने के बावजूद अब तक न तो मरम्मत कराई गई है और न ही संबंधित फर्म आर एस तिवारी पर कोई कार्रवाई हुई है। इसे लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार टेमरी-सिपकोन्हा ग्रुप-1 योजना के तहत जल संसाधन विभाग द्वारा करीब 5 किलोमीटर लंबी छोटी नहर की लाइनिंग का कार्य लगभग डेढ़ साल पहले कराया गया था। लेकिन निर्माण के कुछ ही दिनों बाद नहर के कई हिस्सों में दरारें पड़ने लगीं और जगह-जगह प्लास्टर उखड़ गया। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने उस समय ही निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए विभाग को स्थिति से अवगत कराया था।
बताया जा रहा है कि विभागीय अधिकारियों ने अगली गर्मी से पहले मरम्मत कराने और ठेकेदार से सुधार कार्य करवाने का आश्वासन देकर मामला शांत करा दिया था। लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी न तो जिम्मेदारी तय की गई और न ही मरम्मत कराई गई। नतीजतन इस बार तांदुला जलाशय से छोड़ा गया पानी तालाबों तक पहुंचने से पहले ही जगह-जगह लीकेज होकर खेतों में भर गया था, जिससे बड़े पैमाने. पर पानी की बर्बादी हुई थी। किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग पूरे मामले में चुप्पी साधे बैठा है और किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, बरसात के शुरुआती दौर में ही बेल्हारी और किकिरमेटा के बीच नहर के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए थे। निर्माण के दौरान ही किसानों ने गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन विभाग ने सुधार के वादे के साथ शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया।
•घटिया निर्माण से टूटी किसानों की आस,सुशासन तिहार में शिकायत की तैयारी –
दक्षिण पाटन क्षेत्र लंबे समय से निस्तारी और सिंचाई पानी की समस्या से जूझता रहा है। टेमरी से किकिरमेटा तक माइनर लाइनिंग शुरू होने पर किसानों को बेहतर सिंचाई व्यवस्था की उम्मीद जगी थी, लेकिन घटिया निर्माण और विभागीय लापरवाही ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया।
भाजपा नेता नेतराम निषाद, पूर्व सरपंच जितेशवरी महमल्ला, ग्रामीण रामसिंह बंसोड़ और महेश साहू ने जल संसाधन विभाग से किकिरमेटा माइनर की तत्काल मरम्मत कराने तथा संबंधित ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सुशासन तिहार शिविर से पहले संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो किसानों के हित में सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।