
रायपुर/बालोद। आमतौर पर प्रसव के दौरान अस्पताल का माहौल तनाव और घबराहट से भरा रहता है, लेकिन बालोद के एक निजी अस्पताल में इस बार नजारा कुछ अलग रहा। गुंडरदेही ब्लॉक के ग्राम लिमोरा (सिकोसा) की 23 वर्षीय भरथरी लोकगायिका हेमलता पटेल ने सिजेरियन प्रसव के दौरान डर और तनाव से ध्यान हटाने के लिए लोकगीतों का सहारा लिया। ऑपरेशन थिएटर में कमर में एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद हेमलता ने मुस्कुराते हुए भरथरी गीत गाना शुरू कर दिया। उनके सुरों से ऑपरेशन थिएटर का माहौल सहज और खुशनुमा हो गया। डॉक्टर प्रदीप साहू और उनकी मेडिकल टीम ने इसी दौरान सुरक्षित तरीके से प्रसव कराया। फिलहाल मां और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। मंचों और सोशल मीडिया पर अपनी भरथरी गायकी से पहचान बनाने वाली हेमलता का ऑपरेशन के दौरान गीत गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
एनेस्थीसिया के बाद होश में रहकर गाती रहीं
डॉक्टर प्रदीप साहू के मुताबिक, सिजेरियन प्रसव में कमर के निचले हिस्से में एनेस्थीसिया दिया जाता है, जिससे मरीज को ऑपरेशन के दौरान होश रहता है और वह बातचीत कर सकता है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन थिएटर में मरीजों का तनाव कम करने के लिए कई लोग मंत्र, चालीसा या अन्य धार्मिक पाठ करते हैं। हेमलता ने अपने लिए लोकगायन को तनाव से निपटने का माध्यम बनाया। डॉक्टर साहू ने कहा कि ऐसे मौके बहुत कम देखने को मिलते हैं, जब कोई मरीज ऑपरेशन के दौरान डर के बजाय इतनी सहजता से अपनी कला का प्रदर्शन करे।
‘गीत ने मेरा ध्यान डर से हटा दिया’
हेमलता के लिए भरथरी सिर्फ उनकी कला नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। प्रसव के दौरान भी उन्होंने इसी कला का सहारा लिया। गीत गाने के दौरान उनका ध्यान ऑपरेशन और उससे जुड़े डर के बजाय सुर, लय और सांसों पर केंद्रित रहा। मेडिकल टीम की निगरानी में उन्होंने गीत गाना जारी रखा और इसी दौरान उनकी सुरक्षित डिलीवरी हुई।
विशेषज्ञ बोले- संगीत से तनाव कम करने में मिल सकती है मदद
स्वास्थ्य मनोवैज्ञानिक डॉ. दीप्ति धुरंधर के मुताबिक, प्रसव के दौरान संगीत सुनना या धीमी आवाज में वोकलाइजेशन यानी गायन करना दर्द, तनाव और घबराहट से निपटने में मददगार रणनीति हो सकता है। उनके अनुसार, गाते समय व्यक्ति का ध्यान दर्द से हटकर सुर, आवाज और सांसों पर केंद्रित हो जाता है। इससे मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है। 2023 और 2025 में प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययनों में भी संगीत के इस्तेमाल से दर्द और चिंता की तीव्रता में कमी देखी गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि संगीत या गायन प्रसव के चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं है। इसे केवल चिकित्सकीय निगरानी में तनाव और घबराहट कम करने के एक सहायक उपाय के तौर पर देखा जाना चाहिए।
मां और बच्चा दोनों स्वस्थ
हेमलता के इस अनोखे प्रसव अनुभव ने अस्पताल के माहौल को तो खुशनुमा बनाया ही, साथ ही उनका वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है। फिलहाल हेमलता और उनका नवजात बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं।