लव जिहाद और बहुविवाह पर लगने जा रही कानूनी रोक — असम में हिमंत सरमा सरकार अगले विधानसभा सत्र में पेश करेगी विधेयक

लव जिहाद और बहुविवाह पर लगने जा रही कानूनी रोक — असम में हिमंत सरमा सरकार अगले विधानसभा सत्र में पेश करेगी विधेयक

YC न्यूज़ डेस्क। असम की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार आगामी विधानसभा सत्र को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को घोषणा की कि राज्य सरकार लव जिहाद और बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के लिए नए कड़े कानून लाने जा रही है। इसके साथ ही सत्रों के संरक्षण और चाय बागानों के श्रमिकों को भूमि अधिकार देने संबंधी विधेयक भी इस सत्र में पेश किए जाएंगे। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “अगला विधानसभा सत्र ऐतिहासिक होगा क्योंकि कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। लव जिहाद और बहुविवाह पर रोक के साथ-साथ हमारे सत्रों का संरक्षण और चाय बागानों के श्रमिकों को भूमि अधिकार देने वाले विधेयक शामिल होंगे।”
लव जिहाद और बहुविवाह पर बनेगा सख्त कानून
सरकार का कहना है कि लव जिहाद विरोधी कानून का उद्देश्य महिलाओं को धर्म परिवर्तन के नाम पर होने वाले धोखाधड़ीपूर्ण विवाहों से सुरक्षा प्रदान करना है। वहीं बहुविवाह पर प्रतिबंध से एक समान नागरिक व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ेगा। मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि ये कानून राज्य में सामाजिक संतुलन और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए जा रहे हैं।
सत्र संरक्षण और विकास बोर्ड विधेयक को मिली मंजूरी
असम कैबिनेट पहले ही असम सत्र संरक्षण और विकास बोर्ड विधेयक, 2025 को मंजूरी दे चुकी है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य के ऐतिहासिक सत्रों (वैष्णव मठों) की भूमि, संपत्ति और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और प्रबंधन सुनिश्चित करना है।सरमा ने बताया कि इस विधेयक के तहत एक आयोग गठित किया जाएगा, जो सत्र भूमि को अतिक्रमण और विवादों से मुक्त रखेगा। आयोग पारदर्शी शासन, विरासत पर्यटन और सत्र कला के संवर्धन के माध्यम से सतत आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करेगा।
डिजिटल संग्रह से सहेजी जाएगी सांस्कृतिक धरोहर
विधेयक के अनुसार, आयोग सत्रों की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से संरक्षित करेगा। इसमें भूमि, कलाकृतियों और पांडुलिपियों का विस्तृत डिजिटल आर्काइव तैयार किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर असम के सत्रों की पहचान और पहुंच सुनिश्चित हो सके।आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जबकि सदस्य सचिव भूमि अधिग्रहण और सुधार निदेशक होंगे। साथ ही, दो सदस्य सत्र संस्थानों के प्रतिनिधि होंगे और एक सदस्य भूमि प्रशासन में अनुभवी सेवानिवृत्त सिविल सेवा अधिकारी (सचिव स्तर या उससे ऊपर) होंगे।
सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि ये सभी विधेयक राज्य में सामाजिक सुधार, महिला सुरक्षा, और धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। उन्होंने कहा, “असम सरकार आने वाले सत्र में ऐसे निर्णय लेगी जो आने वाली पीढ़ियों के सामाजिक और सांस्कृतिक भविष्य को दिशा देंगे।”

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