रायपुर । रायपुर शहर के समीप स्थित सोमनाथ घाट, लखना में रविवार को हजारों की संख्या में क्षेत्रीय निवासी और पर्यावरण प्रेमी खारून नदी को बचाने के संकल्प के साथ एकत्र हुए। यह जनसैलाब छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के आह्वान पर उमड़ा, जिसने इस ऐतिहासिक स्थल को झंडों, नारों और जनआंदोलन की आवाजों से भर दिया।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के अमित बघेल और ड़ॉ अजय यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “खारून हमारी जीवनरेखा है। यह हमारे क्षेत्र की आत्मा है और हम इसे सरकार की उपेक्षा और औद्योगिक प्रदूषण की बलि नहीं चढ़ने देंगे। यह आंदोलन साफ पानी, स्वस्थ पारिस्थितिकी और टिकाऊ भविष्य के अधिकार की लड़ाई है।”
कार्यक्रम की शुरुआत सोमनाथ घाट पर सामूहिक जल अर्पण और पूजा के साथ हुई, जो नदी के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है। इसके तुरंत बाद ‘खारून दाई फ्रीडम मार्च’ की औपचारिक शुरुआत हुई। यह पांच दिवसीय जनजागरण यात्रा है, जिसका उद्देश्य नदी में हो रहे औद्योगिक प्रदूषण और सरकार की अनदेखी के खिलाफ जनमत तैयार करना है।
मार्च में बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के स्वयंसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरणविद, किसान, छात्र और ग्रामीण शामिल हुए। यह यात्रा खारून नदी के किनारे बसे गांवों में जाकर लोगों को नदी की दुर्दशा के प्रति जागरूक करेगी और संरक्षण के लिए स्थानीय समर्थन जुटाएगी।
जोहड़ छत्तीसगढ़ी पार्टी के प्रतिनिधियों ने भी मार्च में शामिल होकर इस अभियान को पूर्ण राजनीतिक समर्थन देने की घोषणा की। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “यह सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की लड़ाई है।”
मार्च का समापन 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस पर रायपुर के महादेव घाट में होगा, जहां एक जनसभा और पर्यावरण चार्टर प्रस्तुत किया जाएगा। यह चार्टर सरकार को सौंपा जाएगा, जिसमें खारून नदी के संरक्षण के लिए ठोस प्रतिबद्धताओं की मांग की जाएगी।
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने समाज के सभी वर्गों—किसानों, छात्रों, बुद्धिजीवियों—से आह्वान किया है कि वे खारून दाई को बचाने के लिए इस आंदोलन का हिस्सा बनें और क्षेत्र की जीवनरेखा को पुनर्जीवित करें।