YC न्यूज़ डेस्क। मिडिल ईस्ट संकट और एलपीजी आपूर्ति को लेकर कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं कमलनाथ, आनंद शर्मा और शशि थरूर ने केंद्र सरकार के रुख की सराहना की है, जबकि राहुल गांधी लगातार सरकार पर हमलावर हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भारत की कूटनीतिक रणनीति को “परिपक्व और कुशल” बताते हुए कहा कि सरकार ने अस्थिर वैश्विक स्थिति में संतुलित कदम उठाए हैं। उन्होंने 2 अप्रैल को सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि इस संकट के दौरान सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर राजनीतिक दलों को विश्वास में लिया, जो एक सकारात्मक पहल है। शर्मा ने राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखते हुए संवाद जारी रखने पर जोर दिया।
वहीं मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एलपीजी संकट की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि देश में गैस की कोई वास्तविक कमी नहीं है। उन्होंने छिंदवाड़ा में बयान देते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए कृत्रिम भय का माहौल बना रहे हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी पश्चिम एशिया संकट पर भारत के संयमित रुख का समर्थन किया। उन्होंने अपने एक लेख में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुप्पी कायरता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और रणनीतिक कूटनीतिक दृष्टिकोण है, क्योंकि भारत के राष्ट्रीय हित इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
दूसरी ओर, राहुल गांधी ने सरकार की विदेश नीति और आर्थिक प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि देश में ईंधन की बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे आम जनता पर गंभीर असर पड़ेगा। इसके अलावा, रुपये की कमजोरी और औद्योगिक ईंधन की कीमतों में वृद्धि को उन्होंने आगामी महंगाई का संकेत बताया। इस बीच, भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आनंद शर्मा के बयान को साझा करते हुए कांग्रेस पर ही तंज कसा कि उसके नेता सरकार की नीतियों को सही ठहरा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई पर पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी से रोजमर्रा की वस्तुओं—जैसे खाद्य पदार्थ, उपभोक्ता सामान और चिकित्सा उपकरण—की कीमतों में इजाफा होने की आशंका है।