रायपुर, 22 जून-छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत कई जिलों के निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज कराने आए गरीब मरीजों से इलाज के नाम पर मनमाने पैसे वसूले जाने का बड़ा खुलासा हुआ है। योजना के तहत तय पैकेज में मुफ्त इलाज की सुविधा होने के बावजूद मरीजों और उनके परिजनों से दवा, क्वालिटी इंप्लांट और विशेष इलाज के नाम पर 10 हजार से 1.5 लाख रुपये तक वसूले गए। जांच में कई अस्पताल दोषी पाए गए हैं और उन पर जुर्माना भी लगाया गया है।
100 से अधिक शिकायतें, कई अस्पतालों पर कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग की आयुष्मान हेल्पलाइन 104 पर ऐसे 100 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें बताया गया है कि निजी अस्पतालों ने बिना पक्के बिल के मरीजों से नकद राशि वसूली, ताकि बाद में शिकायत होने पर कोई सबूत न हो। जांच में दोषी पाए जाने पर आरोग्यम हॉस्पिटल, अंकुर हॉस्पिटल समेत कई अस्पतालों पर लाखों का जुर्माना लगाया गया है।
वसूली की कहानियां: जमीन-जायदाद बेचकर इलाज, फिर भी न बचा बेटा
दुर्ग के शुभम का मामला दिल दहला देने वाला है। एक्सीडेंट के बाद उसे रायपुर के दो अस्पतालों में भर्ती किया गया। शुभम की मां बताती हैं कि आयुष्मान कार्ड से इलाज के नाम पर 7 लाख रुपये लिए गए। इसके लिए जमीन, गहने और गाड़ी तक बेचनी पड़ी, फिर भी बेटा नहीं बच पाया।
कई और पीड़ित भी सामने आए:
- लल्लन साहू, दुर्ग: 20 हजार की दवा मंगवाने के बावजूद ICU में इलाज नहीं मिला। अस्पताल पर 11.41 लाख का जुर्माना।
- खुलिया बाई, खरोरा: आयुष्मान की 5 लाख की सीमा पूरी होने के बाद अस्पताल ने और 1 लाख से ज्यादा मांगा, मरीज की मौत हो गई।
- कौशिक राणा, रायपुर: एक्सीडेंट केस में 3.5 लाख नकद लिए, बिल नहीं मिला।
- मेघा वर्मा, बलौदाबाजार: कान के इलाज में दवाओं और टेस्ट के नाम पर 20 हजार की वसूली।
अस्पताल की सफाई:
आरोग्यम हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. नवीनराम दारुका का कहना है, “आयुष्मान योजना में अतिरिक्त राशि नहीं ली जाती, यदि कोई परिस्थिति बनती है तो परिजन को बताया जाता है।”
स्वास्थ्य विभाग का रुख सख्त:
आयुष्मान भारत योजना के छत्तीसगढ़ नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र गहवई ने कहा, “शिकायतों की जांच के बाद दोषी पाए गए अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। यह योजना गरीबों के लिए है, इसका दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
कहां करें शिकायत?
- हेल्पलाइन नंबर: 104 (24×7 सक्रिय)
- ऑनलाइन पोर्टल: आयुष्मान भारत योजना की आधिकारिक वेबसाइट
- जिला कलेक्टर कार्यालय में भी शिकायत दी जा सकती है।
जरूरत है सख्त निगरानी की
राज्य सरकार को आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत अस्पतालों की नियमित जांच, पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था और शिकायत तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है। गरीब मरीजों की जेब काटने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूरी है, ताकि इस जनकल्याणकारी योजना की साख बनी रहे।