अफीम की खेती पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष के आरोपों पर गृहमंत्री का जवाब – 6 हजार किलो से ज्यादा अफीम जब्त, सरकार कर रही है सख्त कार्यवाही,3 आरोपी गिरफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को शून्यकाल के दौरान दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती का मामला जोरदार तरीके से गूंजा। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार पर अफीम की खेती को संरक्षण देने का आरोप लगाया, वहीं सरकार ने पुलिस कार्रवाई और जब्ती की जानकारी देते हुए आरोपों को खारिज किया। शून्यकाल के दौरान विपक्ष की ओर से डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि प्रदेश में धान के बजाय अफीम की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है, लेकिन अब इसे “अफीम का कटोरा” बनाने की शुरुआत हो चुकी है। महंत ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई से जांच कराने या विधायकों की समिति गठित कर पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की।

वहीं सत्ता पक्ष की ओर से अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। बहस के दौरान भूपेश बघेल ने भी हस्तक्षेप करते हुए एफआईआर की कॉपी का जिक्र किया और कहा कि एफआईआर में विनायक ताम्रकार का नाम नहीं है, बल्कि उनके नौकर का नाम दर्ज है, जबकि प्रशासन की ओर से मुख्य आरोपी के रूप में विनायक ताम्रकार का नाम सामने आने की बात कही जा रही है। इस मुद्दे पर सदन का माहौल कुछ समय के लिए काफी गरमा गया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के विधायक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आए।

मामले पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि 6 मार्च 2026 को दुर्ग पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि समोदा गांव में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलगांव थाना क्षेत्र में छापेमारी की गई। अंधेरा होने के कारण पहले फसल को सुरक्षित रखा गया और बाद में आगे की कार्रवाई की गई।
गृहमंत्री ने बताया कि इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और करीब 6 हजार 224 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद की गई, जिसकी बाजार कीमत 7 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि मामले में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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