दुर्ग/भिलाई ! जैन धर्म की महान तप परंपरा के अंतर्गत वर्षीतप पूर्ण करने वाले तपस्वियों का पारणा समारोह सोमवार को महेश कॉलोनी दुर्ग स्थित राधा-कृष्ण मंडप में आयोजित किया गया। लगभग एक वर्ष तक चले इस कठिन तप के समापन पर पूरा वातावरण भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। साधुमार्गी जैन संघ के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम में गुरुदेव अक्षय मुनि और साध्वी हेमप्रभा मसा के सानिध्य में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर 39 वर्षीतप साधकों का पारणा संपन्न हुआ। तपस्वियों ने दृढ़ संकल्प, आत्मबल और अटूट श्रद्धा के साथ वर्षीतप की साधना पूर्ण कर समाज के सामने त्याग, संयम और आत्मअनुशासन का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। पारणा के दौरान विधिपूर्वक आहार ग्रहण कर तप का समापन किया गया।
इस अवसर पर दुर्ग-भिलाई सहित रायपुर, राजनांदगांव, धमतरी, बालोद, नगरी, धमधा और कवर्धा समेत विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ओसवाल जैन पंचायत और जैन समाज के अन्य संगठनों ने तपस्वियों का अभिनंदन किया। महिला मंडल और युवा संघ ने आयोजन में विशेष सहयोग दिया। संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश सांखला ने सभी आगंतुकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। जैन परंपरा के अनुसार भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) ने भी वर्षीतप किया था और उनकी पारणा अक्षय तृतीया के दिन हुई थी, जिससे इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है।
क्या है वर्षीतप?
वर्षीतप जैन धर्म की एक अत्यंत कठिन साधना है, जिसमें साधक लगभग 13 महीने तक एक दिन उपवास और एक दिन भोजन का क्रम अपनाते हैं। यह तप आत्मशुद्धि, संयम और त्याग का प्रतीक माना जाता है। इसके पूर्ण होने पर पारणा किया जाता है, जो साधक की आध्यात्मिक साधना की पूर्णता का प्रतीक होता है।