दुर्ग ! शिवनाथ नदी किनारे बसे दानीकोकड़ी गांव के ग्रामीणों का दर्द सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में खुलकर सामने आया। प्रस्तावित लाइम स्टोन खनन से गांव उजड़ने और खेती छिनने की आशंका को लेकर ग्रामीण “ग्राम बचाओ आंदोलन” के बैनर तले बड़ी संख्या में दुर्ग पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने मांग की कि गांव में चल रहा ड्रोन सर्वे तत्काल रोका जाए और प्रस्तावित खनिज पट्टा निरस्त किया जाए। उनका कहना है कि करीब 4000 की आबादी वाले इस गांव को सीमेंट प्लांट के लिए उजाड़ने की तैयारी की जा रही है, जिससे उनका अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
जानकारी के अनुसार, दानीकोकड़ी और पड़ोसी गांव करेली की कुल 448.170 हेक्टेयर जमीन को खनिज पट्टे के लिए चिन्हित किया गया है। यहां उच्च गुणवत्ता का चूना पत्थर (लाइम स्टोन) मौजूद है, जिसके चलते खनन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी चल रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक आदेश के बजाय वाट्सएप संदेशों के जरिए पंचायत पर दबाव बनाया जा रहा है। इससे लोगों में आक्रोश है। उन्होंने साफ कहा कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का सर्वे या खनन कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस मामले में जिला खनिज अधिकारी दीपक मिश्रा ने बताया कि फिलहाल क्षेत्र का केवल चिन्हांकन किया गया है और अभी सिर्फ एरियल सर्वे किया जा रहा है। खनन से संबंधित कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए जमीन केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि उनकी पहचान और भविष्य है, जिसे किसी भी कीमत पर छीना नहीं जाना चाहिए।