दुर्ग। छत्तीसगढ़ में प्रांतीय अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) अपनी मांगों को लेकर रविवार को सड़कों पर उतर आए। बड़ी संख्या में शिक्षकों ने दुर्ग में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव कर प्रदर्शन किया और सरकार से नियमितीकरण व समान वेतन की मांग उठाई। सरगुजा, कांकेर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे शिक्षकों ने छत्तीसगढ़ प्रांतीय अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले विरोध जताया। उनका कहना है कि वे वर्षों से नियमित शिक्षकों की तरह कक्षा शिक्षण, आईसीटी प्रशिक्षण, निर्वाचन कार्य, एनएसएस, बोर्ड परीक्षा ड्यूटी और कॉपी मूल्यांकन जैसे सभी दायित्व निभा रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें स्थायी दर्जा और समान वेतन नहीं दिया जा रहा।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने मंत्री निवास के बाहर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। तीन थाना प्रभारियों के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और शिक्षकों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
विधानसभा बयान के बाद बढ़ी चिंता
शिक्षकों ने बताया कि हाल ही में विधानसभा में अतिथि शिक्षकों को हटाए जाने की चर्चा से उनके बीच असमंजस की स्थिति बन गई थी। इसी को लेकर उन्होंने मंत्री से स्पष्ट नीति और भविष्य को लेकर ठोस निर्णय की मांग की।
मंत्री ने दिया आश्वासन
प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शिक्षकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों को हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है और इस तरह की बातें बेबुनियाद हैं। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
कैबिनेट में होगा अंतिम निर्णय
शिक्षकों के अनुसार मंत्री ने बताया कि मानदेय का निर्धारण उनकी पात्रता के आधार पर किया जाएगा और पूरे मामले पर कैबिनेट में चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सरकार जल्द समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्य मांगें क्या हैं
अतिथि शिक्षकों ने मंत्री के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें—
- स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन
- समान कार्य के बदले समान वेतन
- ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय
- सरकारी कर्मचारियों की तरह अवकाश सुविधा
शिक्षकों ने बिलासपुर हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कोर्ट भी उनके पक्ष में निर्देश दे चुका है, इसलिए सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।