रायपुर। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ग्राम सभाओं के पक्ष में दिया गया फैसला संविधान की भावना, आदिवासी संस्कृति-परंपरा के संरक्षण और पेसा कानून के प्रावधानों की पुष्टि करता है। उन्होंने इसे आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अब ग्राम सभाएं अपने वैधानिक अधिकारों के तहत यह तय कर सकेंगी कि गांव में धर्म प्रचारकों का प्रवेश होगा या नहीं। यह निर्णय अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की सर्वोच्चता को स्थापित करता है और स्थानीय परंपराओं व सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को संवैधानिक आधार प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि कांकेर जिले की कई पंचायतों ने गांव में ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश निषेध संबंधी बोर्ड लगाए थे। इसके खिलाफ संबंधित समुदाय ने पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि परंपरा और संस्कृति के संरक्षण के लिए पेसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभाएं इस प्रकार के निर्णय लेने के लिए अधिकृत हैं। हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध अपील करते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने अपील खारिज कर दी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में पूरे तथ्यों के साथ राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखा।
विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ग्राम सभाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए पेसा नियमों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह फैसला न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के अन्य अनुसूचित क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा।