कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से प्रशासनिक तंत्र को हिला देने वाली खबर सामने आई है। जिले के कलेक्टर गोपाल वर्मा ने एसपी को पत्र लिखकर अपने बंगले की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। यह मामला इसलिए और गंभीर हो गया है क्योंकि कवर्धा राज्य के गृहमंत्री का गृह जिला है। अब यह सवाल उठ रहा है कि अगर जिला कलेक्टर ही खुद को सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे, तो आम जनता की सुरक्षा कितनी पुख्ता है ।
दरअसल, 19 मई और 15 अगस्त की रात कांग्रेस नेता तुकाराम चंद्रवंशी और उनके साथियों ने कलेक्टर बंगले का घेराव कर देर रात प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप था कि आंधी-पानी के दौरान बिजली गिरने से तीन बंदरों की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन वेटनरी अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। फोन करने पर डॉक्टर का मोबाइल बंद मिला, वहीं तहसीलदार और एसडीएम से भी संपर्क नहीं हो सका। इस लापरवाही से नाराज ग्रामीण रात डेढ़ बजे घायल बंदर के साथ कलेक्टर बंगले पर धरने पर बैठ गए।
प्रदर्शन का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी मौके पर पहुंची और घायल बंदर का उपचार डॉक्टर के घर पर कराया गया।
कलेक्टर वर्मा ने इस घटना को सुरक्षा व्यवस्था की विफलता बताते हुए एसपी से पूछा, “जब रात में प्रदर्शन हो रहा था, तब पुलिस की पेट्रोलिंग पार्टी कहां थी?” उन्होंने बंगले के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा की मांग करते हुए इसे गंभीर प्रशासनिक त्रुटि करार दिया।
कलेक्टर का यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब जिले का सर्वोच्च दंडाधिकारी ही सुरक्षा को लेकर चिंतित हो, तो आम नागरिक कितने सुरक्षित हैं? यह मामला अब सिर्फ कलेक्टर और एसपी के तालमेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिले की कानून-व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े कर रहा है।