सड़क नहीं बनी तो युवक ने मांगा हेलीकॉप्टर, सुशासन तिहार में आवेदन ने खोली व्यवस्था की पोल ! वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहा ग्रामीण, बोला- आवेदन देते-देते चप्पल घिस गई

सड़क नहीं बनी तो युवक ने मांगा हेलीकॉप्टर, सुशासन तिहार में आवेदन ने खोली व्यवस्था की पोल ! वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहा ग्रामीण, बोला- आवेदन देते-देते चप्पल घिस गई

स्कूली बच्चों और ग्रामीणों की परेशानी को व्यंग्यात्मक अंदाज में रखा प्रशासन के सामने

बेमेतरा। सुशासन तिहार के समाधान शिविर में उस समय एक अनोखा आवेदन चर्चा का विषय बन गया, जब एक ग्रामीण ने सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं होने पर प्रशासन से हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने की मांग कर दी। यह आवेदन भले ही पहली नजर में मजाक लगे, लेकिन इसके पीछे वर्षों से उपेक्षित बुनियादी सुविधा को लेकर ग्रामीणों की पीड़ा और नाराजगी साफ झलकती है। मामला साजा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गाड़ाडीह का है। यहां आयोजित सुशासन तिहार शिविर में ग्रामीण राजकुमार ने लोक निर्माण विभाग को आवेदन सौंपते हुए गांव से नवकेशा (देवकर) हाई स्कूल तक जाने वाली जर्जर सड़क के निर्माण की मांग की। उन्होंने आवेदन में लिखा कि यदि सड़क बनाना संभव नहीं है, तो बरसात के दिनों में आवागमन के लिए हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज की सुविधा उपलब्ध करा दी जाए।

ग्रामीण राजकुमार का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए वे कई बार आवेदन दे चुके हैं और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों और मांगपत्रों के बावजूद सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है। उन्होंने कहा कि आवेदन देते-देते उनकी चप्पल तक घिस गई, लेकिन सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया। ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग गांव के छात्रों और आम लोगों के लिए मुख्य आवागमन का रास्ता है। बरसात के मौसम में यहां कीचड़ और जलभराव के कारण स्थिति बेहद खराब हो जाती है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों सहित ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

यह आवेदन उस समय दिया गया जब समाधान शिविर में स्थानीय विधायक ईश्वर साहू और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। हेलीकॉप्टर की मांग वाला यह आवेदन पूरे शिविर में चर्चा का केंद्र बना रहा। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य मजाक करना नहीं, बल्कि प्रशासन का ध्यान वर्षों से लंबित सड़क निर्माण की ओर आकर्षित करना है।

गाड़ाडीह के इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि ग्रामीणों को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी बार-बार गुहार लगानी पड़े, तो विकास और सुशासन के दावों का वास्तविक लाभ आखिर लोगों तक कितना पहुंच रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस आवेदन के पीछे छिपे संदेश को समझकर सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाता है या नहीं।

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