डीजे पर लगाम लगेगी या बढ़ेगा शोर? छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण विधेयक पर नितिन सिंघवी ने उठाए सवाल

साइलेंस जोन की सीमा 200 से घटाकर 100 मीटर करने, निजी परिसरों में डीजे की अनुमति और देर रात तक शोर की छूट पर जताई आपत्ति
रायपुर, 13अक्टूबर। छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रस्तावित कोलाहल नियंत्रण विधेयक, 2026 को लेकर पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने विधेयक के प्रारूप पर अपनी आपत्तियां एवं सुझाव गृह विभाग और पुलिस विभाग के प्रमुख सचिव को सौंपते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य केवल ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग की अनुमति तय करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों को शोर से राहत दिलाना होना चाहिए। उनके अनुसार, प्रस्तावित प्रावधानों में संशोधन नहीं किया गया तो ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की चुनौती बनी रह सकती है।

हाईकोर्ट के आदेश शामिल करने की मांग

सिंघवी ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के जनहित याचिका क्रमांक 112/2016 में 6 दिसंबर 2016 और 27 अप्रैल 2017 को दिए गए आदेशों को विधेयक में शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वाहनों पर साउंड बॉक्स बजाने के मामलों में न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई और रिकॉर्ड संधारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

साइलेंस जोन और डीजे की अनुमति पर आपत्ति

सिंघवी के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक में शांत क्षेत्र की सीमा 200 मीटर से घटाकर 100 मीटर की गई है। उन्होंने इसे कम करने के बजाय कम-से-कम 300 मीटर करने का सुझाव दिया। साथ ही निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिक को मौन क्षेत्र की परिभाषा में स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अनुमति संबंधी प्रस्तावित प्रावधानों के कारण मैरिज गार्डन, निजी मकानों और अन्य निजी परिसरों में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को लेकर अस्पष्टता पैदा हो सकती है।

छह घंटे की छूट और देर रात तक डीजे पर सवाल

प्रस्तावित विधेयक में रैलियों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और उत्सवों के दौरान अनुमति लेकर दिन में अधिकतम छह घंटे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग के प्रावधान पर भी सिंघवी ने आपत्ति जताई। उन्होंने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रतिबंध को प्रभावी बनाए रखने और मध्यरात्रि तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग की विशेष छूट हटाने का सुझाव दिया। उन्होंने स्कूलों के खेल मैदानों एवं शैक्षणिक परिसरों को भी संरक्षण के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की।

जुर्माना बढ़ाने और उपकरण नष्ट करने का सुझाव

सिंघवी ने प्रस्तावित जुर्माने को अधिक प्रभावी बनाने की मांग करते हुए प्रथम उल्लंघन पर 5 से 15 लाख रुपये तथा दूसरे उल्लंघन पर 10 से 15 लाख रुपये तक जुर्माने का सुझाव दिया। उन्होंने बार-बार नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने, प्रथम उल्लंघन को भी गैर-जमानती बनाने तथा विधिसम्मत प्रक्रिया के बाद जब्त उपकरणों की नीलामी के बजाय उन्हें नष्ट करने का प्रावधान करने की बात कही। सिंघवी ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले सभी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए और उच्च न्यायालय के प्रासंगिक आदेशों तथा केंद्रीय ध्वनि प्रदूषण नियमों के अनुरूप स्पष्ट प्रावधान सुनिश्चित किए जाएं। उनका कहना है कि ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण नागरिकों के स्वास्थ्य, नींद, मानसिक शांति और शांतिपूर्ण जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *