रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस बार शीतकालीन सत्र की शुरुआत 14 दिसंबर को रखकर एक ऐतिहासिक क्षण को पुनर्जीवित करने की कोशिश की है। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद पहली बार इसी तारीख को विधानसभा की बैठक आयोजित की गई थी, वह भी रायपुर स्थित राजकुमार कॉलेज मैदान में बने अस्थायी टेंट में। उसी स्मृति को सम्मान देने के उद्देश्य से सरकार ने शीतकालीन सत्र की शुरुआत फिर से 14 दिसंबर को करने का निर्णय लिया है।
• भव्य नए विधानसभा भवन में होगी बैठक
इस वर्ष का सत्र नवा रायपुर स्थित अत्याधुनिक नए विधानसभा भवन में आयोजित होगा। यह बदलाव इतिहास और आधुनिकता के अद्भुत संगम का प्रतीक है— जहाँ 14 दिसंबर 2000 को टेंट में पहली बैठक हुई थी, वही तारीख अब नवीन तकनीक से लैस भव्य भवन में विधायी कार्यवाही की साक्षी बनेगी। सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल आयोजित नहीं किया जाएगा। इसकी जगह सरकार राज्य के दीर्घकालिक विकास खाका ‘छत्तीसगढ़ विजन 2047’ पर विस्तृत चर्चा करेगी।इसमें मुख्य विषय होंगे— आने वाले 25 वर्ष का विकास रोडमैप,आधारभूत संरचना और उद्योग नीति
कृषि, शिक्षा और मानव संसाधन सुधार
जनकल्याण और प्रशासनिक सुधार संबंधी मुद्दे
यह चर्चा राज्य के भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण विमर्श माना जा रहा है।
• 628 प्रश्नों की तैयारी; दूसरे दिन होगा अनुपूरक बजट पेश
सत्र के लिए विधायकों द्वारा कुल 628 प्रश्न लगाए गए हैं—
333 तारांकित प्रश्न
295 अतारांकित प्रश्न
ये प्रश्न धान खरीदी, कानून-व्यवस्था, सड़क सुधार और जनकल्याण योजनाओं जैसे मुद्दों से जुड़े हैं।
15 दिसंबर को सरकार सत्र के दूसरे दिन अनुपूरक बजट पेश करेगी, जिसमें वित्तीय प्राथमिकताओं और नई घोषणाओं पर विस्तृत चर्चा की उम्मीद है।
•कई महत्वपूर्ण विधेयक आएंगे सदन में
इस सत्र में निम्न महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए जाएंगे—
निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक
छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम 2002 में संशोधन
दुकान पंजीयन प्रक्रिया को श्रम विभाग के अधीन करने का प्रस्ताव सदन में 9 दिसंबर से ही ध्यानाकर्षण और स्थगन प्रस्ताव स्वीकार किए जा रहे हैं।
प्रत्येक सदस्य—प्रतिदिन 2 ध्यानाकर्षण,प्रतिदिन 1 स्थगन प्रस्ताव दे सकेगा।संपूर्ण सत्र के लिए सीमा क्रमशः 6 ध्यानाकर्षण और 3 स्थगन प्रस्ताव निर्धारित है।
•इतिहास से आधुनिकता तक की यात्रा
एक साधारण टेंट में शुरू हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा की यात्रा अब नवा रायपुर के भव्य, अत्याधुनिक और तकनीकी सुविधाओं से युक्त भवन तक पहुँच चुकी है। 14 दिसंबर का दिन राज्य की इस ऐतिहासिक विरासत को फिर से जीवंत कर रहा है। इस वर्ष का शीतकालीन सत्र केवल विधायी कार्यवाही के कारण नहीं, बल्कि अपने प्रतीकात्मक महत्व, ऐतिहासिक संदर्भ और राज्य की विकासदृष्टि के कारण भी विशेष महत्त्व रखता है।