WRS मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन; CM साय बोले —सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़े रहना ही प्रभु श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक अनुसरण

WRS मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन; CM साय बोले —सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़े रहना ही प्रभु श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक अनुसरण

रायपुर, 21 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विजयादशमी का पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मार्ग पर अडिग रहने का शाश्वत संदेश देने वाला महान सांस्कृतिक पर्व है। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य का मार्ग कितना भी कठिन क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। सही और गलत के बीच चुनाव की स्थिति में सदैव सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़ा रहना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में आयोजित विजयादशमी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने हजारों लोगों की उपस्थिति और प्रभु श्रीराम के जयकारों के बीच धनुष-बाण से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया। उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।

पांच दशकों से अधिक समय से चली आ रही है रावण दहन की परंपरा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर का डब्ल्यूआरएस मैदान पांच दशकों से अधिक समय से विजयादशमी उत्सव की गौरवशाली परंपरा का साक्षी रहा है। यहां प्रतिवर्ष रावण दहन के माध्यम से अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश दिया जाता है। यह परंपरा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कारों और जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि विजयादशमी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सद्भाव, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।

छत्तीसगढ़ का प्रभु श्रीराम से गहरा आत्मीय संबंध

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़वासियों के लिए विजयादशमी का विशेष महत्व है, क्योंकि इस धरती का प्रभु श्रीराम से गहरा आत्मीय नाता है। छत्तीसगढ़ को माता कौशल्या का मायका और भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ छत्तीसगढ़ के वनांचलों में समय व्यतीत किया था। यही कारण है कि यहां की लोकआस्था, संस्कृति और जनजीवन में प्रभु श्रीराम का विशेष स्थान है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, धैर्य, साहस और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना उनके जीवन से मिलने वाली महत्वपूर्ण सीख है।

शक्ति से बड़ी है सत्य और धर्म की सामर्थ्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रावण के पास अपार सैन्य शक्ति, अस्त्र-शस्त्र और महाबली योद्धाओं की विशाल सेना थी, जबकि प्रभु श्रीराम ने वनवासियों और वानर सेना को संगठित कर उसका सामना किया। यह प्रसंग बताता है कि संसाधनों और बाहुबल से कहीं अधिक बड़ी शक्ति सत्य, धर्म, दृढ़ संकल्प और सामूहिक पुरुषार्थ की होती है।

उन्होंने कहा कि रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन भी संदेश देता है कि असत्य और अधर्म का साथ देने वाला व्यक्ति कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः उसे अपने कर्मों के परिणामों का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक अनुसरण केवल उनकी आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारना भी आवश्यक है। न्याय के पक्ष में खड़ा होना, कमजोर और जरूरतमंद का साथ देना तथा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना ही रामराज्य की मूल भावना है।

आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नीति और माओवाद के खिलाफ अभियान का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नीति का उल्लेख करते हुए ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और नागरिकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करने के संकल्प के साथ काम कर रही है। बस्तर सहित प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विश्वास, विकास और खुशहाली का वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। शांति और सुरक्षा के साथ विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना लक्ष्य है।

श्रीरामलला दर्शन योजना से 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, तप और लंबे संघर्ष से जुड़े संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा देश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण अवसर रहा।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशवासियों की धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों, आस्था और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागिता का आह्वान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सत्य, न्याय, सद्भाव, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करना चाहिए। सामूहिक प्रयासों से ही शांतिपूर्ण, समरस, सुरक्षित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव है। कार्यक्रम को राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा और रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक कुलदीप सिंह जुनेजा, जयंती भाई पटेल, सूर्यकांत राठौर, आयोजन समिति के प्रमुख जी. स्वामी, नेशनल क्लब एवं आयोजन समिति के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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