
दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में परीक्षा कॉपियों के डिजिटलाइजेशन और ऑन-स्क्रीन मार्किंग शुरू करने की तैयारी के बीच टेंडर की एक अहम तकनीकी उलझन दूर कर दी गई है। सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर मूल्यांकन की दर की इकाई गलती से प्रति छात्र दर्ज हो गई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसमें सुधार करते हुए अब प्रति उत्तर पुस्तिका के आधार पर दर तय करने का फैसला किया है। vइस बदलाव के बाद टेंडर में शामिल होने वाली एजेंसियों को छात्र संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि जितनी उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटलाइजेशन और मूल्यांकन किया जाएगा, उसी संख्या के अनुसार अपनी दरें देनी होंगी।
टेंडर की शर्तों में भी मिली राहत
विश्वविद्यालय ने एजेंसियों की पात्रता से जुड़ी तकनीकी शर्त में भी बदलाव किया है। पहले उत्तर पुस्तिकाओं की स्पाइन कटिंग के अनुभव को अनिवार्य शर्त के रूप में रखा गया था। अब इसमें राहत देते हुए स्पाइन कटिंग के साथ-साथ बिना स्पाइन कटिंग उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग का अनुभव रखने वाली एजेंसियों को भी पात्र माना जाएगा। इस बदलाव से टेंडर प्रक्रिया में अधिक एजेंसियों के शामिल होने की संभावना है। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है और विश्वविद्यालय को बेहतर एवं किफायती दरें मिलने की उम्मीद है।
150 से ज्यादा कॉलेज, हर साल 10-12 लाख कॉपियां
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के अंतर्गत दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, राजनांदगांव, कवर्धा और मानपुर-मोहला जिलों के 150 से ज्यादा कॉलेज आते हैं। मुख्य और सेमेस्टर परीक्षाओं को मिलाकर हर साल करीब 10 से 12 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का इस्तेमाल होता है। इतनी बड़ी संख्या में कॉपियों के डिजिटलाइजेशन और मूल्यांकन से विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।
विद्यार्थियों को जल्द मिल सकता है रिजल्ट
डिजिटल मूल्यांकन शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा विद्यार्थियों को मिलने की संभावना है। उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने के कारण मूल्यांकन की प्रक्रिया तेज होगी और समय पर रिजल्ट जारी करने में मदद मिलेगी। डिजिटल सिस्टम में अंकों का जोड़ सॉफ्टवेयर के जरिए किया जाएगा। इससे टोटलिंग की गलतियों की संभावना कम होगी। वहीं किसी प्रश्न या पेज का मूल्यांकन छूटने पर सिस्टम अलर्ट के जरिए इसकी जानकारी दे सकेगा।
कॉपियों के परिवहन और रखरखाव का खर्च घटेगा
डिजिटल मूल्यांकन लागू होने के बाद विश्वविद्यालय को हर साल लाखों उत्तर पुस्तिकाओं को अलग-अलग मूल्यांकन केंद्रों तक पहुंचाने और वापस लाने की जरूरत कम होगी। इससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स का खर्च घटने की उम्मीद है। इसके अलावा कॉपियों के गुम होने, भीगने या फटने जैसी समस्याओं का जोखिम भी काफी कम हो जाएगा। योग्य बाहरी और दूरदराज के प्राध्यापक सुरक्षित लॉगिन के जरिए कॉलेज या घर से भी मूल्यांकन कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के लिए डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था परीक्षा प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।