
रायपुर। राजधानी रायपुर में कारोबारी से 1.13 करोड़ रुपए की ठगी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘वॉश एंड वॉश’ और ‘ब्लैक करेंसी’ स्कैम गैंग के सरगना समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह लंबे समय से देशभर में सक्रिय था और शुरुआती जांच में 100 से ज्यादा लोगों से 100 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपियों को उस समय गिरफ्तार किया, जब वे गुजरात के दो कारोबारियों से करीब 4.20 करोड़ रुपए की ठगी की तैयारी में थे। इसके लिए आरोपियों ने पुणे के खंडाला में 3.25 लाख रुपए में एक आलीशान रिसॉर्ट किराए पर लिया था। क्राइम ब्रांच ने सूचना के आधार पर रिसॉर्ट में छापा मारा। पुलिस को देखकर आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी कर सभी को पकड़ लिया गया। आरोपियों के कब्जे से 17 मोबाइल फोन, ब्लैक पेपर, कांच की प्लेट और अन्य सामान बरामद किया गया है।
2005 से सक्रिय था गिरोह
डीसीपी क्राइम राजनाला स्मृतिक के अनुसार, गुरुग्राम निवासी ज्ञान प्रकाश उर्फ योगी (46) गिरोह का मास्टरमाइंड है। उसने बनारस निवासी प्रवीण श्रीवास्तव उर्फ कैप्टन उर्फ रेड्डी (52) और मनोज श्रीवास्तव उर्फ बड़े सर उर्फ बॉस (55) के साथ मिलकर गिरोह शुरू किया था। समय के साथ इसमें कई अन्य लोग जुड़ते गए। पुलिस के मुताबिक, गिरोह वर्ष 2005 से अलग-अलग शहरों में इसी तरह की ठगी करता आ रहा था। छत्तीसगढ़ के अलावा नोएडा, पुणे, बड़ौदा, उदयपुर, दिल्ली और अन्य शहरों में भी इसके नेटवर्क का पता चला है।
पहले खुद ठगा गया, फिर बना ठग
जांच में सामने आया है कि गिरोह का सरगना ज्ञान प्रकाश करीब 20 साल पहले खुद नोट दोगुना करने के झांसे में 25 लाख रुपए गंवा चुका था। इसके बाद वह इसी तरह की ठगी करने वाले लोगों के संपर्क में आया और बाद में उसने अपना गिरोह खड़ा कर लिया। पुलिस का कहना है कि इसके बाद ज्ञान प्रकाश ने देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को फंसाने के लिए सुनियोजित तरीके से नेटवर्क तैयार किया।
दाऊद कनेक्शन का झांसा देकर डराते थे
गिरोह के सदस्य पीड़ितों पर दबाव बनाने के लिए फिल्मी अंदाज में पूरा माहौल तैयार करते थे। रायपुर के कारोबारी उमेश गुप्ता को कथित तौर पर डी कंपनी और दाऊद इब्राहिम से कनेक्शन होने का झांसा दिया गया। आरोपी ब्लैक पेपर और कांच के बर्न का इस्तेमाल कर यह विश्वास दिलाते थे कि किसी विशेष केमिकल की मदद से कागज को असली नोट में बदला जा सकता है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित का भरोसा जीतने के लिए मारपीट और केमिकल से जुड़ी घटनाओं का नाटक भी किया जाता था।
आलीशान होटल और रिसॉर्ट में बनाते थे माहौल
गैंग के सदस्य संभावित शिकार को प्रभावित करने के लिए फाइव स्टार होटल और बड़े रिसॉर्ट में मुलाकात करते थे। महंगे होटल, फ्लाइट टिकट, टैक्सी और पार्टियों पर पैसा खर्च किया जाता था, ताकि पीड़ितों को लगे कि सामने वाला बड़ा कारोबारी या प्रभावशाली व्यक्ति है। उमेश गुप्ता को भी नागपुर, मुंबई और बेंगलुरु बुलाया गया। पुलिस के मुताबिक, उन्हें कई दिनों तक ठहराया गया और पर्यटन स्थलों पर घुमाने के साथ पार्टियां भी कराई गईं।
1.13 करोड़ रुपए लेकर दिया काले कागज का बर्न
पुलिस के मुताबिक, लगातार संपर्क और भरोसा कायम करने के बाद उमेश गुप्ता ने आरोपियों को 1.13 करोड़ रुपए दे दिए। आरोपियों ने दावा किया कि रकम को केमिकल में डालकर सुरक्षित रखा गया है। उमेश नागपुर से कांच का बर्न लेकर रायपुर आए थे। उन्हें बताया गया कि उसमें उनका पैसा केमिकल में डुबोकर रखा गया है और कुछ समय बाद उससे बड़ी रकम तैयार हो जाएगी। करीब एक महीने तक उन्होंने बर्न नहीं खोला। पुलिस की सलाह पर जब इसे खोला गया तो उसमें काले कागज मिले। आरोपियों ने कथित तौर पर उमेश से 10 करोड़ रुपए की व्यवस्था करने पर 45 करोड़ रुपए देने का वादा किया था। शुरुआत में 25 लाख रुपए देने की बात होने पर आरोपी रायपुर आए और नोटों की गड्डियां देखकर गए। पुलिस के मुताबिक, रकम की पुष्टि और भरोसा बढ़ाने के लिए वे कई बार रायपुर पहुंचे थे।
गैंग में हर सदस्य की अलग भूमिका
पुलिस जांच में आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं सामने आई हैं। ज्ञान प्रकाश को मास्टरमाइंड बताया गया है, जो पुलिस को भ्रमित करने के लिए ऑनलाइन मेडिटेशन क्लास भी चलाता था। प्रवीण श्रीवास्तव अलग-अलग नामों और पहचान के साथ संभावित शिकार से संपर्क कर योजना तैयार करता था। मनोज श्रीवास्तव शुरुआती मुलाकात कर शिकार को विश्वास में लेने का काम करता था। शुभम पांडेय होटल और रिसॉर्ट की बुकिंग व मीटिंग की व्यवस्था करता था। योगेंद्र चौहान खुद को विधायक बताकर प्रभाव जमाता था, जबकि बालमुकुंद दीक्षित फर्जी कारोबारी बनकर गैंग को पैसा देने का नाटक करता था। विवेक सिंह केमिकल से जुड़ा पूरा नाटक करता और कथित तौर पर पीड़ित के सामने अपनी पिटाई का ड्रामा किया जाता था।
पहले भी जेल जा चुके हैं आरोपी
पुलिस के अनुसार, प्रवीण और मनोज श्रीवास्तव पहले भी ठगी के मामलों में मुंबई में जेल जा चुके हैं। मनोज को वाराणसी पुलिस भी गिरफ्तार कर चुकी है। अब रायपुर पुलिस आरोपियों के पुराने मामलों और देशभर में फैले नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक किन-किन लोगों को अपना शिकार बनाया और ठगी की रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।