बांध से पानी छोड़े जाने के बावजूद माइनर नहरों में पर्याप्त जल नहीं पहुंचने का आरोप, रानीतराई में किसानों की बैठक के बाद कलेक्टर से करेंगे शिकायत, मांग पूरी नहीं होने पर शांतिपूर्ण धरने की चेतावनी
जामगांव आर। धान की फसल को सिंचाई के लिए पानी की जरूरत के बीच दक्षिण पाटन क्षेत्र के रानीतराई, सुरपा और टेमरी माइनर में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने का मामला सामने आया है। खेतों में नमी कम होने और फसल सूखने की आशंका के बीच किसान नाराजगी जता रहे हैं। किसानों का कहना है कि बांध से पानी छोड़े जाने के बावजूद नहरों के अंतिम छोर और संबंधित माइनर क्षेत्रों तक पर्याप्त जल नहीं पहुंच रहा है, जिससे फसल की सिंचाई प्रभावित हो रही है। किसानों के मुताबिक, सिपकोन्हा माइनर के रानीतराई और सुरपा सेक्शन में पानी की आपूर्ति बेहद कम है। उनका कहना है कि रानीतराई सेक्शन में पर्याप्त सिंचाई के लिए 16 मिल पर लगभग दो फीट पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में वहां छह इंच पानी भी नहीं पहुंच रहा है। किसानों ने इसे सिंचाई व्यवस्था में लापरवाही बताते हुए संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
किसानों का तर्क है कि जब पर्याप्त बारिश के बाद बांध में जलभराव है और पानी छोड़ा जा चुका है, तो नहरों में उनकी क्षमता के अनुसार जलप्रवाह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। टेल एरिया तक पानी पहुंचाने के नाम पर दूसरे क्षेत्रों की सिंचाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। किसानों ने सिंचाई विभाग से जल वितरण व्यवस्था दुरुस्त करने और सभी प्रभावित गांवों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने की मांग की है।
रानीतराई में जुटेंगे कई गांवों के किसान
समस्या को लेकर सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12 बजे रानीतराई स्थित सिंचाई विश्राम गृह में किसानों की बैठक बुलाई गई है। इसमें असोगा, औसर, डीडगा, रेंगकथेरा, डिघारी, करेला, खपरी, चूलगहन, रानीतराई और कौही सहित आसपास के गांवों के किसानों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की गई है। किसानों के अनुसार, बैठक में नहरों में पर्याप्त पानी छोड़ने की मांग को लेकर सामूहिक रूप से आवाज उठाई जाएगी। इसके बाद जिला कलेक्टर से मिलकर सिंचाई की समस्या और संबंधित अधिकारियों की कथित लापरवाही की शिकायत करने की भी योजना है। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
सिंचाई संकट को लेकर किसानों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब खेती और किसानों की आजीविका से जुड़ी समस्या सामने है, तब जनप्रतिनिधियों को भी सक्रिय होकर समाधान के लिए पहल करनी चाहिए। किसानों का सवाल है कि नहर में पानी की मांग को लेकर ग्रामीणों को ही बार-बार सामने क्यों आना पड़ता है? अब किसानों की नजर सिंचाई विभाग की कार्रवाई और नहरों में पर्याप्त जलप्रवाह बहाल होने पर है। धान की फसल को समय पर पानी नहीं मिला, तो इसका असर उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। ऐसे में किसान जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।