छत्तीसगढ़ में देश का पहला राज्य स्तरीय AI कॉन्क्लेव: शिक्षा में AI के इस्तेमाल का बनेगा रोडमैप, ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल से जोड़ने ‘लाईका चिन्हारी’ ऐप लॉन्च

छत्तीसगढ़ में देश का पहला राज्य स्तरीय AI कॉन्क्लेव: शिक्षा में AI के इस्तेमाल का बनेगा रोडमैप, ड्रॉपआउट बच्चों को स्कूल से जोड़ने ‘लाईका चिन्हारी’ ऐप लॉन्च

रायपुर। छत्तीसगढ़ ने विद्यालयीन शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल की है। रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में 17 सितंबर को स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से राज्य स्तरीय AI कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। समग्र शिक्षा के तहत हुए इस आयोजन में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, बच्चों के समग्र विकास और मौजूदा डिजिटल संसाधनों के बेहतर उपयोग में AI की संभावनाओं पर चर्चा हुई। स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, विद्यालयीन शिक्षा के स्तर पर AI के प्रभावी उपयोग की दिशा में पहल करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है।

ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान के लिए ‘लाईका चिन्हारी’ ऐप

कॉन्क्लेव में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने ‘लाईका चिन्हारी’ ऐप का विमोचन किया। यह ऐप शाला त्यागी यानी ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान करने और उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए तैयार किया गया है। ऐप के माध्यम से ऐसे बच्चों की जानकारी जुटाने और उनकी शिक्षा में वापसी की प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने का प्रयास किया जाएगा। इससे स्कूल से बाहर हो चुके बच्चों को चिन्हित कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।

शिक्षक की जगह नहीं लेगा AI

स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलजीत सिंह ने कहा कि मौजूदा तकनीकी दौर में AI का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका उपयोग स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि AI का उद्देश्य शिक्षकों का स्थान लेना नहीं, बल्कि उनके काम को आसान और प्रभावी बनाना है। AI को शिक्षक के सहायक के रूप में इस्तेमाल करने पर शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

स्मार्ट क्लास और ICT लैब को AI से जोड़ने पर जोर

समग्र शिक्षा की आयुक्त डॉ. किरण कौशल ने कहा कि कॉन्क्लेव के जरिए प्रदेश के स्कूलों में संचालित स्मार्ट क्लास और ICT लैब के उपयोग को AI की मदद से और प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। स्कूलों में पहले से मौजूद डिजिटल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ AI आधारित नए समाधान विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों तक सरल और सुगम तरीके से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है।

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन के विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कॉन्क्लेव में देश-विदेश के तकनीकी और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। गूगल, वाधवानी एआई, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, एडोब, खान एकेडमी और फिजिक्स वाला के विशेषज्ञों ने AI और शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा IIT भिलाई, IIM रायपुर, NIT रायपुर और छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (CHiPS) के विशेषज्ञों ने भी तकनीक आधारित शिक्षा और AI के संभावित उपयोग पर जानकारी साझा की।

कॉन्क्लेव के सुझावों से तैयार होगा AI रोडमैप

कॉन्क्लेव में सामने आए सुझावों और तकनीकी समाधानों का स्कूल शिक्षा विभाग आगे अध्ययन करेगा। इनके आधार पर छत्तीसगढ़ के स्कूलों के लिए व्यापक AI रोडमैप तैयार करने की योजना है।

इसमें शिक्षकों की सहायता के लिए AI आधारित संसाधन विकसित करने, स्कूलों में उपलब्ध डिजिटल सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने और तकनीक के जरिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा तय की जाएगी। इस तरह AI कॉन्क्लेव को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित रखने के बजाय इसके निष्कर्षों को आगे की शिक्षा व्यवस्था और तकनीकी योजनाओं में शामिल करने की तैयारी की जा रही है।

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