
दुर्ग /बिलासपुर। पाटन विधानसभा चुनाव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और भाजपा सांसद विजय बघेल के बीच चल रही राजनीतिक लड़ाई अब एक बार फिर न्यायिक मोर्चे पर आगे बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भूपेश बघेल की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें विजय बघेल की चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त करने की मांग की गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद अब विजय बघेल की चुनाव याचिका पर आगे साक्ष्य और सुनवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी। यह मामला 2023 के पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। विजय बघेल ने भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की है। इसके जवाब में भूपेश बघेल की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन पेश कर याचिका को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की गई थी। आवेदन में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी हवाला दिया गया था।
राजनीतिक मुकाबले के बाद अब कानूनी लड़ाई का अगला चरण
पाटन विधानसभा की यह लड़ाई महज चुनावी नतीजे तक सीमित नहीं रही है। 2024 के चुनाव में भूपेश बघेल और विजय बघेल चौथी बार आमने-सामने थे और अब निर्वाचन को लेकर विवाद हाईकोर्ट में चल रहा है। भूपेश बघेल की ओर से याचिका की प्रारंभिक वैधानिकता पर सवाल उठाया गया, जबकि विजय बघेल की ओर से इसका जवाब देकर मामले को आगे बढ़ाने की पैरवी की गई। जानकारी के अनुसार 10 सितंबर को विजय बघेल और उनके गवाह एवं अधिवक्ता सौरभ चौबे साक्ष्य दर्ज कराने हाईकोर्ट पहुंचे थे, लेकिन आदेश 7 नियम 11 के तहत आवेदन पर सुनवाई के कारण उस दिन साक्ष्य दर्ज नहीं हो सके। अब हाईकोर्ट द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद चुनाव याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता खुल गया है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है विवाद
इस मामले की कानूनी लड़ाई पहले सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुकी है। अगस्त 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की एसएलपी पर हाईकोर्ट की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था। इसके बाद हाईकोर्ट में चुनाव याचिका की आगे की कार्यवाही और साक्ष्य की प्रक्रिया जारी रहने का रास्ता खुला था।
फैसला अभी बाकी, राजनीतिक असर पर निगाहें
हाईकोर्ट के मौजूदा आदेश का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इससे पाटन चुनाव से जुड़ा विवाद तत्काल समाप्त नहीं हुआ है। अब मामले में साक्ष्य, दलील और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर फैसला होगा। हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा भूपेश बघेल की प्रारंभिक आपत्ति खारिज किए जाने को चुनाव याचिका में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं माना जा सकता। अदालत ने फिलहाल केवल याचिका को प्रारंभिक स्तर पर समाप्त करने की मांग को स्वीकार नहीं किया है। चुनाव से जुड़े मूल आरोपों पर अंतिम निर्णय आगे की सुनवाई और साक्ष्यों के आधार पर होगा।