
रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव फिलहाल लंबित हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की मौजूदगी में हुई कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक में जोगी कांग्रेस के विलय और उसके नेताओं की कांग्रेस में वापसी के प्रस्ताव पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। प्रस्ताव को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। अब 27 सितंबर को छत्तीसगढ़ के नए कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत के रायपुर दौरे के दौरान प्रदेश पदाधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। इसके बाद जोगी कांग्रेस के कांग्रेस में विलय और संबंधित नेताओं की वापसी को लेकर पार्टी स्तर पर निर्णय लिया जा सकता है।
रेणु जोगी और अमित जोगी की वापसी का प्रस्ताव
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) की ओर से कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव पहले ही दिया जा चुका है। इसमें पार्टी की प्रमुख डॉ. रेणु जोगी, प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी समेत अन्य पदाधिकारियों और नेताओं की कांग्रेस में वापसी की बात कही गई है। यह प्रस्ताव पहले से कांग्रेस की अनुशासन समिति के समक्ष लंबित था। शुक्रवार की बैठक में इस पर चर्चा हुई, लेकिन समिति ने फिलहाल अंतिम निर्णय नहीं लिया।
36 नेताओं की वापसी के आवेदन पर चर्चा
बैठक में पार्टी से निष्कासित नेताओं और कार्यकर्ताओं की कांग्रेस में वापसी से जुड़े 36 आवेदन भी रखे गए। इनमें कुछ आवेदनों को मंजूरी दी गई, जबकि 15-16 आवेदन निरस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। बैठक में अनुशासन समिति के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू, प्रभारी सचिव एस. संपत, जरिता लैतफलांग, विजय जांगिड वर्चुअल रूप से जुड़े। वहीं प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, धनेश पाटिला, प्रतिमा चंद्राकर, रवि घोष, जेपी श्रीवास्तव, दीपक मिश्रा और नरेश ठाकुर समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों पर भी नजर
कांग्रेस की अनुशासन समिति पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की सार्वजनिक गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक सोशल मीडिया पोस्ट, न्यूज चैनल और अखबारों में दिए गए बयान तथा सार्वजनिक मंचों पर की गई टिप्पणियों को भी अनुशासन के नजरिए से देखा जा सकता है। पार्टी के संविधान में कांग्रेस की स्वीकृत नीतियों और कार्यक्रमों की सार्वजनिक रूप से प्रतिकूल आलोचना को अनुशासन से जोड़ा गया है। चुनाव के दौरान अधिकृत प्रत्याशी या संगठन के फैसले के खिलाफ काम करने, पार्टी लाइन से अलग सार्वजनिक अभियान चलाने अथवा लगातार अनुशासन तोड़ने के मामलों को गंभीरता से लिए जाने की संभावना है।
बड़े नेताओं के बयानों पर भी निगरानी
सूत्रों के अनुसार, पार्टी संगठन के खिलाफ लगातार सार्वजनिक बयान देने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के मामलों में पहले नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा सकता है। जवाब और मामले की परिस्थितियों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। बड़े नेताओं के सार्वजनिक बयानों पर भी समिति की नजर रहने की बात कही जा रही है।
धनेंद्र साहू, अध्यक्ष, कांग्रेस अनुशासन समिति:
“जोगी कांग्रेस के पार्टी में विलय का आवेदन आया है। इसे फिलहाल रोककर रखा गया है। बाद में इस पर निर्णय लिया जाएगा। दर्जनभर से ज्यादा आवेदन निरस्त किए गए हैं। कुछ आवेदनों को स्वीकृत किया गया है।”