तेलीगुंडरा में किसानों के बाद अब बेजुबानों की बारी: 20 घंटे की मूसलाधार बारिश में 100 मवेशी बेहाल,कल प्रशासन ने गौशाला भेजने का दिया था भरोसा, आज भी सामुदायिक भवन परिसर में डटे मवेशी

तेलीगुंडरा में किसानों के बाद अब बेजुबानों की बारी: 20 घंटे की मूसलाधार बारिश में 100 मवेशी बेहाल,कल प्रशासन ने गौशाला भेजने का दिया था भरोसा, आज भी सामुदायिक भवन परिसर में डटे मवेशी

किसानों में बढ़ी नाराजगी, बोले—समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो फिर करेंगे एसडीएम कार्यालय का घेराव

रानीतराई/पाटन। खुले में घूम रहे मवेशियों से फसलों को हो रहे नुकसान के विरोध में गुरुवार को पाटन की ओर निकले किसानों को तेलीगुंडरा के पास रोकने के बाद प्रशासन ने मवेशियों को अस्थायी रूप से सामुदायिक भवन परिसर में रखने और उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेजने का भरोसा दिलाया था। लेकिन एक दिन बाद भी करीब 100 मवेशियों के सामुदायिक भवन परिसर में मौजूद होने और लगातार बारिश के बीच उनके चारा-पानी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में पिछले करीब 20 घंटे से रुक-रुककर तेज बारिश हो रही है। ऐसे में खुले परिसर में रखे गए मवेशियों के लगातार भीगने की स्थिति बनी हुई है। किसानों का आरोप है कि मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा और पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। कुछ मवेशियों की हालत भी कमजोर नजर आने की बात ग्रामीणों ने कही है।

कल अधिकारियों ने दिया था शिफ्ट करने का भरोसा

गौरतलब है कि गुरुवार को औसर, रानीतराई, असोगा सहित आसपास के गांवों के किसान बड़ी संख्या में मवेशियों को लेकर पाटन की ओर निकले थे। किसानों का उद्देश्य एसडीएम एवं तहसील कार्यालय पहुंचकर खुले में घूम रहे मवेशियों से फसलों को हो रहे नुकसान की समस्या उठाना था। तेलीगुंडरा के पास प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को रोककर चर्चा की थी। मौके पर एसडीएम उत्तम ध्रुव, तहसीलदार मनोज गुप्ता, नायब तहसीलदार मनोज रस्तोगी, जनपद पंचायत सीईओ महेंद्र जांगड़े सहित पुलिस बल मौजूद था। चर्चा के दौरान प्रशासन की ओर से मवेशियों को सुरक्षित स्थान अथवा गौशाला भेजने की प्रक्रिया की बात कही गई थी। किसानों का कहना है कि कुछ मवेशियों को वहां से हटाया गया, लेकिन बड़ी संख्या में मवेशी अब भी उसी परिसर में मौजूद हैं।

बारिश के बीच बेजुबानों की हालत पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि किसानों की मूल समस्या खुले में घूमने वाले मवेशियों से फसल बचाने की थी, लेकिन अब तेलीगुंडरा में रखे गए मवेशियों की देखभाल भी प्रशासन के सामने चुनौती बन गई है। लगातार बारिश के बीच मवेशियों के लिए पर्याप्त आश्रय, चारा और पानी की व्यवस्था नहीं होने की स्थिति में उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।

किसानों की मांग—मवेशी वापस गांवों में न छोड़े जाएं

किसानों ने स्पष्ट किया है कि वे मवेशियों को वापस खुले में छोड़े जाने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि मवेशियों को फिर गांवों की सड़कों और खेतों में छोड़ दिया गया तो खड़ी फसलों को नुकसान की समस्या दोबारा खड़ी हो जाएगी। किसानों ने मांग की है कि मवेशियों को स्थायी रूप से सुरक्षित गौशाला या अन्य उपयुक्त स्थान पर रखने की व्यवस्था की जाए और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की जाए।

फिर गरमा सकता है मामला

मवेशियों की वर्तमान स्थिति और प्रशासन के आश्वासन के बाद भी व्यवस्था पूरी नहीं होने को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही मवेशियों के लिए चारा, पानी और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था नहीं की गई तथा उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिला, तो वे दोबारा एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी मांग रखेंगे।

अब सवाल यह है कि तेलीगुंडरा में रखे गए करीब 100 मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर कब तक भेजा जाएगा, उनकी देखभाल की जिम्मेदारी किसकी होगी और खुले में घूमने वाले मवेशियों से किसानों की फसलों को बचाने के लिए प्रशासन स्थायी व्यवस्था कब लागू करेगा।

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