युवा मित्र मंडल की पहल, पूर्वजों की स्मृति को हरित विरासत से जोड़ने का संकल्प,2021 में लगाए गए 54 रुद्राक्ष पौधों से शुरू हुई वाटिका में अब 28 परिवारों की स्मृतियां होंगी संरक्षित
जामगांव आर। पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनकी स्मृतियों को हरित विरासत के रूप में संजोने की अभिनव पहल के तहत शनिवार को सर्व पितृमोक्ष अमावस्या पर बेल्हारी स्थित दुर्ग जिले की पहली रुद्राक्ष वाटिका में सामूहिक रुद्राक्ष रोपण अभियान का शुभारंभ हुआ। युवा मित्र मंडल बेल्हारी के संयोजन में आयोजित इस अभियान के पहले दिन 11 परिवारों ने अपने पूर्वजों एवं परिजनों की स्मृति में रुद्राक्ष के पौधे रोपे। अभियान से जुड़े शेष 17 परिवार रविवार को शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ पर पौधारोपण करेंगे। इस प्रकार कुल 28 परिवारों की स्मृतियां रुद्राक्ष वाटिका में वृक्षों के रूप में संजोई जाएंगी। कार्यक्रम की शुरुआत पं कुलदीप तिवारी द्वारा वनस्पति पूजन और रुद्राक्ष रोपण से हुई। इसके बाद रुद्राक्ष पौधों के लिए आर्थिक सहयोग देने वाले परिवारों ने अपने पूर्वजों एवं परिजनों की स्मृति में पौधों का रोपण किया। भूतेश्वर महादेव परिसर में विकसित हो रही रुद्राक्ष वाटिका में आयोजित इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण और पूर्वजों के सम्मान से जोड़ना है।
पूर्वजों की स्मृति को जीवंत रखने का प्रयास : मनीष चंद्राकर
कार्यक्रम संयोजक मनीष चंद्राकर ने कहा कि जिन पूर्वजों ने हमें जीवन दिया और जिन माता-पिता ने संस्कार दिए, उनकी स्मृति में देववनस्पति रुद्राक्ष का पौधा लगाना कृतज्ञता व्यक्त करने का एक सार्थक माध्यम है। संस्था का प्रयास है कि पूर्वजों की स्मृति केवल तस्वीरों और यादों तक सीमित न रहे, बल्कि वृक्षों के रूप में आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवंत विरासत बने। मौके पर पं कुलदीप तिवारी ने कहा कि “एक पौधा—एक स्मृति, एक पौधा—एक संकल्प और एक पौधा—आने वाली पीढ़ियों के नाम”* की भावना के साथ शुरू किया गया यह अभियान समाज को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा। बताया गया कि शनिवार को 11 परिवारों ने इस संकल्प को साकार किया है, जबकि शेष 17 परिवार कल नवरात्रि के प्रथम दिन अपने पौधे रोपेंगे।
2021 में यहाँ हुई थी जिले की पहली रुद्राक्ष वाटिका की स्थापना
गौरतलब है कि वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत बेल्हारी द्वारा उपलब्ध कराई गई शासकीय भूमि पर युवा मित्र मंडल बेल्हारी ने रुद्राक्ष शोध संस्थान छत्तीसगढ़ के सहयोग से दुर्ग जिले की पहली रुद्राक्ष वाटिका स्थापित की थी। इसका शुभारंभ तत्कालीन गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू एवं रुद्राक्ष शोध संस्थान के अध्यक्ष आचार्य पं. गिरधर शर्मा की उपस्थिति में हुआ था। प्रारंभ में यहां गंगटोक (सिक्किम) की शिवालिक पहाड़ियों से मंगाए गए 54 रुद्राक्ष के पौधे लगाए गए थे, जो अब वृक्ष बनने की ओर अग्रसर हैं।
इसी वाटिका को विस्तार देने और पूर्वजों की स्मृतियों को प्रकृति से जोड़ने के उद्देश्य से इस वर्ष सामूहिक रुद्राक्ष रोपण का अभियान शुरू किया गया है। युवा मित्र मंडल का मानना है कि यह पहल धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी को भी मजबूत करेगी। संस्था ने नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने माता-पिता, पूर्वजों एवं परिवारजनों की स्मृति में पौधे लगाएं और उनके संरक्षण का संकल्प लें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति और संस्कारों से जुड़ी एक अनमोल विरासत मिल सके। इस अवसर पर समाजसेवी प्रदीप तोमर, शिक्षक ताराचंद महतो,ग्राम प्रमुख मंजुलाल भारती,हलधर महमल्ला,यादमल गोलछा,भूषण चंद्राकर, ईश्वर सिन्हा,रामसिंह बंसोड, कुंदन सिन्हा, डॉ रेवाराम साहू,पत्रकार पूर्णनेन्द्र सिन्हा, राहुल कुलदीप,जीतेन्द्र धनकर सहित अन्य उपस्थित रहे।