नंदराज पहाड़ बचाने 18 गांव एकजुट: डिपॉजिट-13 में 7,200 पेड़ों की कटाई की तैयारी का दावा, ग्रामीण बोले- अब आर-पार की लड़ाई; बड़े आंदोलन की तैयारी

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में बैलाडीला के डिपॉजिट-13 और नंदराज पर्वत क्षेत्र में खनन गतिविधियों के विरोध में ग्रामीण एक बार फिर लामबंद होने लगे हैं। रविवार को पहाड़ियों के पीछे बसे तामोड़ी गांव में संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति की बैठक हुई। इसमें गमपुर, डोलीगुड़ा, हिरोली सहित करीब 18 गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में नंदराज पर्वत को बचाने, जंगल और पर्यावरण की रक्षा तथा डिपॉजिट-13 क्षेत्र में पेड़ों की कटाई रोकने को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। पर्यावरण बचाओ मंच, मूलवासी बचाओ मंच और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया। समिति से जुड़े पूर्व पदाधिकारी नंदा कुंजाम, राजू भास्कर, जोगा कुंजाम, देवसिंह और मनीष कुंजाम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों से पहाड़ और जंगल प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में अब इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाकर व्यापक आंदोलन की तैयारी की जाएगी।

2019 में भी हुआ था बड़ा आंदोलन

डिपॉजिट-13 के विरोध में ग्रामीण पहले भी आंदोलन कर चुके हैं। संयुक्त पंचायत जन संघर्ष समिति ने वर्ष 2019 में किरंदुल स्थित एनएमडीसी चेकपोस्ट के सामने करीब पांच दिनों तक प्रदर्शन किया था। उस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष आंदोलन में शामिल हुए थे। आंदोलन के दौरान एनएमडीसी की शिफ्ट बसों को रोकने की बात भी सामने आई थी। समिति से जुड़े लोगों का दावा है कि आंदोलन के चलते एनएमडीसी का उत्पादन प्रभावित हुआ था और कंपनी को 100 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हुआ था।

7,200 पेड़ों की कटाई का दावा

बैठक में डिपॉजिट-13 की पहाड़ी तक रास्ता बनाने के लिए पेड़ों की कटाई का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। ग्रामीणों का दावा है कि रास्ते के लिए करीब 7,200 पेड़ों की कटाई की अनुमति मिलने की जानकारी सामने आई है। उनका कहना है कि वन विभाग की ओर से काटे जाने वाले पेड़ों की मार्किंग भी की जा चुकी है। समिति ने आरोप लगाया कि पेड़ों की कटाई का काम ठेकेदार के माध्यम से शुरू कराने की तैयारी है। इसी को लेकर ग्रामीणों ने विरोध तेज करने की रणनीति बनाई है।

गांव-गांव जाकर आंदोलन से जोड़ेंगे ग्रामीण

बैठक में तय किया गया कि नंदराज पर्वत और डिपॉजिट-13 से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके लिए समिति के सदस्य आसपास के गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से संपर्क करेंगे और उन्हें आंदोलन से जोड़ेंगे। समिति की ओर से आंदोलन की अगली तारीख और स्थान की औपचारिक घोषणा जल्द किए जाने की बात कही गई है।

ग्रामसभा के अधिकारों पर भी उठे सवाल

बैठक में अनुसूचित क्षेत्र में ग्रामसभा की भूमिका और अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए गए। ग्रामीणों ने कहा कि ग्रामसभा की कार्यवाही और उसके निर्णयों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पूर्व में ग्रामसभा शून्य रहने के बाद पेड़ों की कटाई किए जाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों ने जमीन की लीज से जुड़े दस्तावेज और शर्तें सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना है कि जमीन की लीज निरस्त होने के बाद किन शर्तों पर दोबारा लीज दी गई, इसकी भी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। समिति ने डिपॉजिट-13 को लेकर एनएमडीसी से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

राशन-पानी के मुद्दे पर भी आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने बताया कि नंदराज की लीज NCL को दिए जाने के बाद क्षेत्र में नाराजगी है। अब ग्रामीण राशन-पानी सहित स्थानीय मुद्दों को लेकर भी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। बैठक में तय किया गया कि इन मुद्दों को एक साथ उठाकर आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।

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