CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पंचायत के रिटायर्ड कर्मचारियों को नहीं मिलेगा पेंशन का अधिकार, 24 याचिकाएं खारिज; जनपद पंचायत कर्मियों पर लागू सेवा नियमों में नहीं है प्रावधान

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पंचायत विभाग के रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन की मांग को लेकर दायर 24 याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस बीडी गुरु की पीठ ने कहा कि जनपद पंचायत के कर्मचारी राज्य सरकार के नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं और उन पर लागू सेवा नियमों में पेंशन का प्रावधान नहीं है। ऐसे में केवल सरकारी कर्मचारी के तौर पर पेंशन का दावा नहीं किया जा सकता। दरअसल, अलग-अलग जिलों के पंचायत कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर कर कहा था कि उन्होंने पंचायत विभाग में लंबे समय तक सेवाएं दी हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। याचिकाकर्ताओं ने छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 का हवाला देते हुए पुराने कर्मचारियों को वेतन, भत्ते और सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाने की मांग की थी।

जनपद पंचायत कर्मचारियों पर लागू हैं अलग सेवा नियम

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनपद पंचायत के कर्मचारियों की सेवा शर्तों के लिए अलग नियम लागू होते हैं। इन नियमों में पेंशन देने का प्रावधान नहीं है। हालांकि, कोर्ट की यह टिप्पणी पंचायत विभाग में कार्यरत हर कर्मचारी पर समान रूप से लागू नहीं होती। शासन से सीधे नियुक्त नियमित कर्मचारियों और उनके अलग शासकीय सेवा वर्ग इस मामले से प्रभावित नहीं होंगे।

गुंडरदेही और तखतपुर में पेंशन का दिया था उदाहरण

याचिकाकर्ताओं ने सुनवाई के दौरान बालोद जिले की गुंडरदेही और बिलासपुर जिले की तखतपुर जनपद पंचायत का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कुछ कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान किया जा रहा है। उनका तर्क था कि जब कुछ कर्मचारियों को पेंशन मिल रही है तो उन्हें भी इसका लाभ दिया जाना चाहिए। इस पर राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि गुंडरदेही के तीन और तखतपुर के तीन कर्मचारियों को स्थानीय स्तर पर बनाए गए पेंशन कोष से भुगतान किया जा रहा है। यह भुगतान राज्य सरकार की किसी वैधानिक पेंशन योजना के तहत नहीं हो रहा है। सरकार ने यह भी बताया कि इस मामले में संबंधित अधिकारियों को अगस्त 2026 में कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

धारा 131 से नया पेंशन अधिकार नहीं बनता

हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 131 पहले से मिल रहे वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को सुरक्षित रखने से संबंधित है। इस धारा के आधार पर ऐसा नया पेंशन अधिकार पैदा नहीं किया जा सकता, जिसका प्रावधान कर्मचारी की सेवा शर्तों या किसी वैधानिक योजना में पहले से मौजूद नहीं है। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति के समय सेवानिवृत्ति लाभ भविष्य निधि योजना के तहत दिए जाने का प्रावधान था। उनकी सेवा के दौरान ऐसा कोई बदलाव भी नहीं हुआ, जिससे उन्हें पेंशन का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो गया हो।

दूसरी पंचायत में पेंशन मिलने से अधिकार नहीं बनता

हाईकोर्ट ने यह तर्क भी स्वीकार नहीं किया कि किसी दूसरी जनपद पंचायत में कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान किया जा रहा है, इसलिए सभी कर्मचारियों को पेंशन मिलनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि किसी जनपद पंचायत द्वारा अपने स्तर पर किया गया भुगतान दूसरे कर्मचारियों के लिए वैधानिक पेंशन अधिकार पैदा नहीं कर सकता। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि न्यायपालिका कानून नहीं बना सकती और न ही सरकार को किसी विशेष तरीके से कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। यदि लागू कानून में किसी लाभ का प्रावधान नहीं है तो केवल इस आधार पर उसे देने का आदेश नहीं दिया जा सकता कि वह लाभ उचित या आवश्यक प्रतीत होता है।

पेंशन नहीं मिलने का कानूनी आधार क्या है?

पंचायत कर्मचारियों को पेंशन नहीं मिलने के मामले में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 का नियम 2(2)(घ) महत्वपूर्ण है। इसके तहत अंशदायी भविष्य निधि का लाभ पाने वाले कर्मचारियों पर सिविल सेवा पेंशन नियम लागू नहीं होते। इसके अलावा छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (भर्ती और सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1999 में भी पंचायत कर्मचारियों को पेंशन देने का कोई प्रावधान नहीं है। इसी कानूनी स्थिति के आधार पर हाईकोर्ट ने पेंशन की मांग वाली 24 याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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