
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब सड़क, बिजली, पानी, सिंचाई और डिजिटल कनेक्टिविटी की योजनाएं अलग-अलग नहीं, बल्कि अगले 20 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखकर एकीकृत तरीके से तैयार की जाएंगी। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत प्रदेश की दीर्घकालिक समग्र कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस मिशन के तहत प्रदेश के रोड नेटवर्क का 20 साल का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें मौजूदा सड़कों की स्थिति के साथ भविष्य में विकसित होने वाले क्षेत्रों, औद्योगिक गतिविधियों और उनकी कनेक्टिविटी की जरूरतों का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर यह तय किया जाएगा कि आने वाले वर्षों में कहां नई सड़कें बनानी हैं और किन मौजूदा मार्गों की क्षमता बढ़ानी है।
PWD होगा नोडल विभाग
लोक निर्माण विभाग को छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन का नोडल विभाग बनाया गया है। रोड नेटवर्क के मास्टर प्लान में अगले दो दशक की जरूरतों के अनुसार नई परियोजनाओं और क्षमता विस्तार वाले मार्गों की पहचान की जाएगी। इसके आधार पर अलग-अलग परियोजनाओं की प्राथमिकता तय होगी।
हर साल का अलग एक्शन प्लान
20 साल के दीर्घकालिक मास्टर प्लान के साथ हर वर्ष का अलग एक्शन प्लान भी तैयार किया जाएगा। इसमें संबंधित वर्ष में किए जाने वाले कार्यों, उनकी प्राथमिकता, संसाधनों और समय-सीमा को निर्धारित किया जाएगा। बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए निजी और सार्वजनिक निवेश के साथ नए फंडिंग मॉडल की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। इसके अलावा दूसरे राज्यों में विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं का अध्ययन कर उपयोगी मॉडल अपनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
लॉजिस्टिक्स हब की संभावनाओं का होगा अध्ययन
मिशन के तहत प्रदेश में इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा। सड़क और रेल समेत अलग-अलग परिवहन माध्यमों को जोड़कर माल परिवहन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी परियोजनाओं को चिन्हित किया जाएगा। लॉजिस्टिक्स हब में सामान के भंडारण, पैकेजिंग, छंटाई, लोडिंग-अनलोडिंग और परिवहन जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं। सड़क और रेल कनेक्टिविटी को एक साथ जोड़ने से माल को एक परिवहन माध्यम से दूसरे माध्यम में स्थानांतरित करना आसान होगा।
सड़क के साथ बिजली-पानी और डिजिटल नेटवर्क की भी प्लानिंग
छत्तीसगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन का दायरा सिर्फ सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत ऊर्जा, ट्रांसमिशन, जल, सिंचाई, संचार और फाइबर नेटवर्क की जरूरतों को भी एक साथ ध्यान में रखा जाएगा। किसी क्षेत्र में बड़ी सड़क या अन्य कनेक्टिविटी परियोजना प्रस्तावित होने पर वहां भविष्य में बिजली, पानी और डिजिटल नेटवर्क की जरूरत का भी आकलन किया जाएगा। इससे अलग-अलग विभागों की परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने की कोशिश होगी।
उद्योग और रोजगार को मिल सकता है फायदा
छत्तीसगढ़ देश के मध्य हिस्से में स्थित होने के कारण सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम के बाजारों से जुड़ता है। ऐसे में रणनीतिक स्थानों पर लॉजिस्टिक्स हब विकसित होने से माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे कोयला, स्टील, सीमेंट, कृषि उत्पाद और अन्य औद्योगिक सामान की आवाजाही को व्यवस्थित करने के साथ वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन जैसी गतिविधियों में निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स और उससे जुड़ी सेवाओं में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।