रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले तीन वर्षों के दौरान Scheduled Castes and Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के तहत 2455 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक है। आंकड़ों के अनुसार 1013 मामले रेप के हैं, जो कुल मामलों का करीब 41 प्रतिशत हैं, जबकि 73 हत्या के मामले भी दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी राज्य सरकार ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दी। भाजपा विधायक Punnulal Mohle के लिखित प्रश्न के जवाब में उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री Vijay Sharma ने सदन में यह आंकड़े प्रस्तुत किए। ये आंकड़े 1 जनवरी 2023 से 16 फरवरी 2026 तक राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किए गए हैं।
मारपीट, अपहरण और गंभीर चोट के भी मामले
सरकार की ओर से दिए गए विवरण के मुताबिक, रेप और हत्या के अलावा 380 मामलों में मारपीट कर चोट पहुंचाने, 60 मामलों में गंभीर चोट पहुंचाने और 30 मामलों में अपहरण की घटनाएं दर्ज की गई हैं। सदन में बताया गया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े अपराधों में महिलाओं के खिलाफ मामलों की संख्या सबसे अधिक सामने आई है।
इन जिलों में सबसे ज्यादा केस
जिलेवार आंकड़ों में Janjgir-Champa जिले में सबसे अधिक 168 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद Balrampur, Chhattisgarh में 165 मामले सामने आए हैं। राज्य के कुल 33 जिलों में से 8 जिलों में 100 से ज्यादा केस दर्ज होने की जानकारी सरकार ने दी है।
2269 मामलों में कोर्ट में चालान पेश
सरकार के अनुसार बड़ी संख्या में मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान प्रस्तुत कर दिया है। अब तक 2269 मामलों में चालान पेश किया जा चुका है, जबकि 166 मामलों की जांच अभी जारी है। इसके अलावा 20 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है।
पीड़ितों को आर्थिक सहायता का प्रावधान
सरकार ने बताया कि इस कानून के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। अपराध की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग राशि निर्धारित की जाती है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के मुताबिक 16 फरवरी 2026 तक 1647 मामलों में पीड़ितों को आर्थिक मदद दी जा चुकी है, जिसके तहत ₹28 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई है। कई मामलों में यह राशि नियमानुसार किस्तों में जारी की जाती है।
670 मामलों में प्रक्रिया लंबित
सरकार ने यह भी बताया कि 670 मामलों में आर्थिक सहायता की प्रक्रिया अभी लंबित है। इन मामलों के प्रस्ताव आदिम जाति विकास विभाग की मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित पीड़ितों को भी सहायता राशि जारी की जाएगी। विधानसभा में प्रश्न के जरिए सामने आए इन आंकड़ों से स्पष्ट हुआ है कि राज्य में SC-ST एक्ट के तहत बड़ी संख्या में मामले दर्ज हुए हैं और अधिकांश मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में कार्रवाई आगे बढ़ा दी है।