रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकार की प्रस्तावित गौधाम योजना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने योजना को ‘हवा-हवाई’ बताते हुए राज्य की भाजपा सरकार पर पशुधन की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि सवा दो साल में केवल तीन गौधाम बन पाना सरकार की नीतियों की असफलता को दर्शाता है। शनिवार को रायपुर में जारी बयान में ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में छुट्टा और घुमंतू मवेशी सड़कों पर भूखे-प्यासे भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की राजनीतिक द्वेष भावना के कारण पशुधन की स्थिति बदतर हो गई है और इससे किसानों तथा आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आंकड़ों का खेल खेलने का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार खुद मानती है कि प्रदेश में 1 लाख 84 हजार 993 से अधिक छुट्टा और घुमंतू मवेशी हैं, लेकिन सवा दो साल के दौरान केवल 11 गौधाम पंजीकृत हुए और उनमें से भी सिर्फ 3 का निर्माण पूरा हुआ है। एक गौधाम की क्षमता लगभग 200 मवेशियों की है। इस हिसाब से केवल करीब 600 पशुओं को ही आश्रय मिल पाया, जबकि बाकी 1 लाख 84 हजार से अधिक मवेशी अब भी सड़कों पर घूम रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं और खुली चराई की समस्या बढ़ रही है।
चारे की राशि पर भी उठाए सवाल
ठाकुर ने सरकार द्वारा प्रति पशु 10 रुपये प्रतिदिन चारे की राशि तय किए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतनी कम राशि में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराना संभव नहीं है। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि 1460 गौधाम बनाने का दावा सिर्फ कागजों तक सीमित है और इसके जरिए भाजपा-आरएसएस से जुड़े लोगों को सरकारी जमीन पर कब्जा दिलाने की साजिश की जा रही है।
‘नरवा-गरवा-घुरवा-बारी’ योजना का किया बचाव
कांग्रेस नेता ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार की Narva Garva Ghurva Bari Yojana का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में करीब 10 हजार गोठान बनाए गए थे, जिनमें से लगभग 7 हजार आत्मनिर्भर हो चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने कई गोठानों में ताला लगवा दिया, जिससे मवेशियों की देखभाल प्रभावित हुई और महिला स्व-सहायता समूहों का रोजगार भी छिन गया। कांग्रेस का कहना है कि गोठानों के बंद होने से खुली चराई की समस्या बढ़ी है, जिसके कारण किसान अपनी फसलों को बचाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। पार्टी ने सरकार से पशुधन संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।