रायपुर/धरमजयगढ़। हाथियों और अन्य वन्यप्राणियों को रेल हादसों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने निर्माणाधीन रेल कॉरीडोर में बड़ा कदम उठाया है। करीब 2500 करोड़ रुपए की लागत से 35 वाइल्ड लाइफ अंडरपास और ओवरपास बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं का सकारात्मक असर भी दिखने लगा है। धरमजयगढ़ रेल लाइन पर तैयार 3 ओवरपास और 3 अंडरपास का उपयोग वन्यप्राणी, विशेषकर हाथी, नियमित रूप से कर रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में इस रेल लाइन पर किसी भी वन्यप्राणी के घायल होने की घटना सामने नहीं आई है, जिससे वन विभाग को बड़ी राहत मिली है। खरसिया-धरमजयगढ़-उरगा-कुसमुंडा-गेवरारोड-पेंड्रारोड निर्माणाधीन रेल कॉरीडोर बीहड़ जंगलों से होकर गुजर रहा है। इस रेल लाइन के 35 ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं जहां हाथियों की आवाजाही अधिक रहती है। इन्हीं संवेदनशील स्थानों पर 21 अंडरपास और 14 ओवरपास बनाए जा रहे हैं, ताकि वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित न हो।
धरमजयगढ़ कॉरीडोर में दिखा सकारात्मक असर
खरसिया-धरमजयगढ़ 124 किलोमीटर लंबे रेल खंड में 3 अंडरपास और 3 ओवरपास का निर्माण पूरा हो चुका है। इनकी लंबाई 60 से 80 मीटर और चौड़ाई लगभग 30 मीटर है। इनका उपयोग धरमजयगढ़ के जंगलों में विचरण कर रहे हाथियों द्वारा किया जा रहा है। वन अधिकारियों के अनुसार अब हाथियों का पूरा झुंड इन अंडर और ओवरपास से सुरक्षित रूप से गुजरता है। हाल में सामने आए वीडियो और तस्वीरों में हाथियों को इन मार्गों का उपयोग करते देखा गया है।
पांच वन मंडलों से गुजर रही रेल लाइन
यह कॉरीडोर खरसिया, धरमजयगढ़, कोरबा, कटघोरा और मरवाही वन मंडलों के जंगलों से होकर गुजर रहा है। इनमें से मरवाही को छोड़ शेष चार वन मंडलों में बड़ी संख्या में हाथी मौजूद हैं। बिलासपुर वनवृत्त में वर्तमान में लगभग 180 हाथी विचरण कर रहे हैं, जिनमें सर्वाधिक संख्या कटघोरा और धरमजयगढ़ वन मंडल में है। धरमजयगढ़-उरगा 62 किलोमीटर खंड में 2 अंडरपास और 7 ओवरपास निर्माणाधीन हैं। वहीं गेवरारोड से पेंड्रारोड के मध्य 155 किलोमीटर में शेष अंडरपास और ओवरपास बनाए जा रहे हैं।
केंद्रीय टीम के निर्देश पर हुआ प्रावधान
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की टीम ने पूरे क्षेत्र का दौरा कर वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों से चर्चा की थी। इसके बाद वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेल परियोजना में अंडर और ओवरपास का प्रावधान जोड़ा गया। IRCON International (इरकॉन) के सीईओ शिव कुमार ने बताया कि वाइल्ड लाइफ संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इस परियोजना में लगभग 2500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह पहल न केवल हाथियों बल्कि अन्य वन्यप्राणियों के लिए भी जीवनरक्षक साबित हो रही है। रेल परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण और विकास के संतुलन का यह मॉडल भविष्य की योजनाओं के लिए उदाहरण बन सकता है।