रायपुर। छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षाओं की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के अब ‘बुरे दिन’ शुरू होने वाले हैं। राज्य सरकार इसी बजट सत्र में ‘छत्तीसगढ़ लोक परीक्षा अधिनियम’ लाने जा रही है। प्रस्तावित कानून में नकल, पेपर लीक और संगठित परीक्षा घोटालों पर सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। यदि कोई परीक्षार्थी नकल करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे 1 से 5 वर्ष तक की जेल और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। वहीं नकल कराने वाले गिरोहों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 1 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। दरअसल, बीते कुछ वर्षों में प्रदेश की कई बड़ी भर्ती परीक्षाएं विवादों में रही हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा 2022 को लेकर व्यापक विवाद हुआ था, जिसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। इसी तरह वर्ष 2025 में छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की पीडब्ल्यूडी भर्ती परीक्षा के दौरान बिलासपुर के एक केंद्र में हाईटेक नकल का मामला सामने आया था। इन घटनाओं के बाद परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में विधानसभा में कहा था कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी रोकने और युवाओं के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार ‘छत्तीसगढ़ लोक परीक्षा अधिनियम’ ला रही है। इसे नकल माफिया और पेपर लीक गिरोहों पर निर्णायक प्रहार माना जा रहा है।
संगठित अपराध और सेवा प्रदाताओं पर भी शिकंजा
नए अधिनियम के तहत केवल परीक्षार्थी ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े एजेंसियां, सेवा प्रदाता संस्थान, कंपनियां और अन्य संबंधित पक्ष भी कानून के दायरे में होंगे। यदि किसी संस्था या कंपनी की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। संगठित नकल गिरोहों के लिए न्यूनतम 5 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की सजा और 1 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। बार-बार अपराध करने पर आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकेगी।
नकल करने वाले परीक्षार्थियों पर कड़ी रोक
भर्ती परीक्षाओं में नकल करते पकड़े गए परीक्षार्थियों का परिणाम रोका जाएगा। उन्हें 3 से 5 वर्ष तक राज्य की किसी भी भर्ती परीक्षा में बैठने से वंचित किया जा सकेगा। गंभीर मामलों में 1 से 5 वर्ष की जेल और 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा दोषी पाए जाने पर सजा 10 वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है।
कोचिंग संस्थानों पर भी सख्ती
कोई भी कोचिंग संस्थान किसी लोक परीक्षा में सफलता की गारंटी देकर युवाओं को प्रवेश के लिए प्रलोभन नहीं दे सकेगा। चयन या सफलता से जुड़ी झूठी, भ्रामक या भड़काऊ जानकारी प्रकाशित करना प्रतिबंधित होगा। ऐसे मामलों में संबंधित संस्थानों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
शैक्षणिक परीक्षाएं दायरे से बाहर
शैक्षणिक, तकनीकी या व्यावसायिक योग्यता प्राप्त करने के लिए आयोजित परीक्षाएं इस नए अधिनियम के दायरे से बाहर रहेंगी। इन परीक्षाओं में नकल या अनुचित साधनों के मामलों में ‘छत्तीसगढ़ लोक परीक्षा (अनुचित साधन रोकथाम अधिनियम, 2008)’ के तहत ही कार्रवाई जारी रहेगी।
इन कृत्यों को माना गया अपराध
- नकल करना या किसी से नकल करवाना
- प्रश्नपत्र लीक करना, प्राप्त करना या साजिश रचना
- परीक्षा कक्ष में शरीर, वस्त्र या अन्य वस्तुओं पर संकेत अंकित करना
- ओएमआर शीट, उत्तर पुस्तिका या मूल्यांकन अभिलेखों में छेड़छाड़
- फर्जी वेबसाइट बनाना या नकली प्रवेश/नियुक्ति पत्र जारी करना
- परीक्षा से जुड़े कंप्यूटर सिस्टम या नेटवर्क में अवैध हस्तक्षेप
- मेरिट और रैंक निर्धारण से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ी
- नकली पेपर को असली बताकर आर्थिक लाभ लेना
- परीक्षा तिथि या पालियों के आवंटन में हेरफेर
सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने के बाद भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और युवाओं का भरोसा मजबूत होगा। अब देखना होगा कि प्रस्तावित ‘छत्तीसगढ़ लोक परीक्षा अधिनियम’ परीक्षा प्रणाली को कितनी मजबूती प्रदान कर पाता है।