
अंबिकापुर, 30 मई 2026। सरगुजा जिले के दरिमा गांव में हाल ही में शुरू हुई शासकीय अंग्रेजी शराब दुकान का विरोध अब नए और अनोखे रूप में सामने आया है। ग्राम पंचायत दरिमा के एक युवक ने सुशासन तिहार शिविर में पहुंचकर महुआ शराब बेचने के लिए लाइसेंस जारी करने की मांग कर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच नई बहस छेड़ दी है। दरिमा निवासी मुनेश्वर सिंह ने शिविर में आवेदन प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि सरकार गांव में अंग्रेजी शराब की बिक्री के लिए शासकीय दुकान संचालित कर सकती है, तो स्थानीय लोगों को भी पारंपरिक महुआ शराब बेचने की वैधानिक अनुमति मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि इससे ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति को भी संरक्षण मिलेगा। आवेदन में मुनेश्वर सिंह ने उल्लेख किया कि आदिवासी अंचलों में महुआ से पेय पदार्थ तैयार करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में सरकार को स्थानीय उत्पादों की बिक्री के लिए भी नीति बनानी चाहिए, ताकि ग्रामीण आर्थिक रूप से लाभान्वित हो सकें।
पहले से चल रहा है विरोध
गौरतलब है कि दरिमा में अंग्रेजी शराब दुकान खुलने के बाद से ही ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं में नाराजगी देखी जा रही है। कुछ दिन पहले ग्रामीण महिलाओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दुकान को हटाने की मांग की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के बीच स्थापित शराब दुकान से सामाजिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। उनका कहना है कि इससे युवाओं और विद्यार्थियों पर गलत असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है तथा नशे की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल सकता है।
चर्चा में आया आवेदन
सुशासन तिहार शिविर में दिया गया यह आवेदन अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग इसे शराब दुकान के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे स्थानीय रोजगार और पारंपरिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन दरिमा में शराब दुकान को लेकर चल रहा विवाद अब महुआ शराब के लाइसेंस की मांग के साथ नए मोड़ पर पहुंच गया