पत्रकारों के विरोध के बाद झुकी साय सरकार, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मीडिया कवरेज पर लगी रोक फिलहाल हटी

रायपुर | छत्तीसगढ़ की साय सरकार द्वारा शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में मीडिया कवरेज पर लगाई गई पाबंदी को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। पत्रकार संगठनों और मीडिया कर्मियों के विरोध के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बुधवार को निर्देशों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की घोषणा की। इस फैसले को लेकर सरकार को चौतरफा आलोचना का सामना करना पड़ रहा था। पत्रकारों का कहना था कि मीडिया कवरेज पर प्रतिबंध लगाना स्वास्थ्य तंत्र में पारदर्शिता खत्म करने का प्रयास है।

मंत्री का बयान: मीडिया का सम्मान सर्वोपरि

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। हमने हमेशा मीडिया का सम्मान किया है। इसलिए चिकित्सा महाविद्यालयों में मीडिया प्रबंधन को लेकर जारी सभी निर्देशों को स्थगित किया जा रहा है। भविष्य में किसी भी फैसले से पहले मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा की जाएगी।”

क्या था आदेश?

हाल ही में राज्य सरकार ने आदेश जारी किया था कि शासकीय अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में पत्रकारों के प्रवेश, कवरेज और रिपोर्टिंग पर सीमाएं तय की जाएंगी। इसके तहत बिना अनुमति पत्रकारों के प्रवेश पर रोक थी।इस कदम को सरकार ने “व्यवस्थित मीडिया प्रबंधन” बताया था, लेकिन इसे सूचना पर नियंत्रण की कोशिश के तौर पर देखा गया।

पत्रकार संगठनों ने जताया था विरोध

मीडिया संगठनों ने रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर समेत अन्य शहरों में इसका विरोध दर्ज कराया। पत्रकारों ने कहा कि यह आदेश स्वतंत्र रिपोर्टिंग पर हमला है और आमजन से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों को दबाने की कोशिश है।

भाजपा की बैठक में समर्थन, लेकिन दबाव में बदलाव

छत्तीसगढ़ भाजपा विधायक दल की बैठक में इस पाबंदी को लेकर चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में स्वास्थ्य संस्थानों में अनुशासन बनाए रखने के लिए इसे जरूरी कदम बताया गया।मंत्री केदार कश्यप ने इस आदेश का बचाव करते हुए कहा था सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए यह कदम जरूरी था। इससे अच्छे परिणाम सामने आएंगे।हालांकि, विपक्ष, मीडिया और जनप्रतिनिधियों के दबाव के चलते अंततः आदेश पर फिलहाल रोक लगाई गई।

क्या आगे फिर आएगा ऐसा प्रस्ताव?

स्वास्थ्य मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आदेश को रद्द किया गया है या केवल स्थगित किया गया है। संभावना है कि सरकार इस मुद्दे पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद संशोधित दिशा-निर्देश ला सकती है।

निष्कर्ष:

राज्य सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि जनता और मीडिया की आवाज की ताकत के आगे सरकार को झुकना पड़ा है। अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए मीडिया की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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