रायपुर -छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बीजेपी के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संभावित राज्य दौरे से यह अटकलें और भी मजबूत हो गई हैं कि इस बार मंत्रिमंडल विस्तार पर निर्णय हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को खास तवज्जो दी जाएगी। चर्चाएं हैं कि हरियाणा मॉडल को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ में 3 नए मंत्री बनाए जा सकते हैं।
हरियाणा फॉर्मूला क्या है?
हरियाणा फॉर्मूले के तहत विभिन्न संभागों से संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है। छत्तीसगढ़ में इस फार्मूले के अनुसार रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और बस्तर संभागों से एक-एक मंत्री बनाए जा सकते हैं।
संभावित नामों की चर्चा:
- रायपुर संभाग: पूर्व मंत्री राजेश मूणत और उत्कल समाज से विधायक पुरंदर मिश्रा का नाम चर्चा में है।
- दुर्ग संभाग: गजेंद्र यादव का नाम सामने आ रहा है, ताकि ओबीसी के यादव समाज को प्रतिनिधित्व मिल सके।
- बिलासपुर: पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का नाम मजबूत है।
- बस्तर: यदि सरगुजा से किसी मंत्री को हटाया गया, तो यहां से किसी नए चेहरे को मौका मिल सकता है।
वर्तमान कैबिनेट का क्षेत्रीय संतुलन
वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत कुल 11 मंत्री हैं:
- सरगुजा संभाग: 4 मंत्री (CM साय सहित)
- बिलासपुर: 3 मंत्री
- दुर्ग: 2 मंत्री
- रायपुर: 1 मंत्री
- बस्तर: 1 मंत्री
इस संतुलन को बेहतर बनाने के लिए सरगुजा से एक मंत्री की छुट्टी की संभावना जताई जा रही है, ताकि रायपुर और बस्तर को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके।
जातिगत समीकरण की बात करें तो:
- आदिवासी वर्ग: 3 मंत्री (CM विष्णु देव साय, राम विचार नेताम, केदार कश्यप)
- अनुसूचित जाति: 1 मंत्री (दयाल दास बघेल)
- ओबीसी वर्ग: 6 मंत्री — सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व
- अरुण साव (डिप्टी CM), ओपी चौधरी, श्याम बिहारी जायसवाल, लखन लाल देवांगन, टंकराम वर्मा, लक्ष्मी राजवाड़े
- सामान्य वर्ग: 1 मंत्री (विजय शर्मा, डिप्टी CM)
यही कारण है कि अब यादव समाज, सवर्ण समुदाय और उत्कल समाज को साधने की कोशिशें हो रही हैं, जिससे राजनीतिक और सामाजिक संतुलन बनाया जा सके।
अमित शाह की यात्रा बन सकती है निर्णायक
22-23 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा और निर्णय संभव है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान से अंतिम मंजूरी के बाद जल्द ही नए मंत्रियों की शपथ हो सकती है।
निष्कर्ष
साय सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। हरियाणा मॉडल के जरिए क्षेत्रीय असंतुलन दूर करने, जातीय प्रतिनिधित्व संतुलित करने और 2028 की तैयारियों के मद्देनज़र यह विस्तार राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।