
YC न्यूज़ डेस्क । मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में एएसआई की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद रविवार सुबह विधि-विधान से पूजा-अर्चना शुरू हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां वाग्देवी के चित्र लेकर भोजशाला पहुंचे और गर्भगृह में विशेष पूजा संपन्न की गई। सुबह सूर्योदय के साथ मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए। पूजा से पहले भोजशाला परिसर का गोमूत्र से शुद्धिकरण किया गया। श्रद्धालुओं ने गर्भगृह को रंगोली और धार्मिक सजावट से आकर्षक स्वरूप दिया। भोजशाला परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर की अखंड ज्योत को भी गर्भगृह में स्थापित किया गया। इसके बाद मां वाग्देवी की महाआरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया और कई लोगों ने भजन-कीर्तन व नृत्य कर खुशी व्यक्त की।
संतों और जनप्रतिनिधियों ने भी की पूजा
शनिवार शाम केंद्रीय राज्य मंत्री Savitri Thakur और मांडू के संत महामंडलेश्वर निसर्ग दास जी महाराज भी भोजशाला पहुंचे थे। उन्होंने पूजा-अर्चना कर परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। वहीं धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना और एसपी सचिन शर्मा ने भी भोजशाला पहुंचकर पूजा की और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सावित्री ठाकुर ने कहा कि पहले शुक्रवार के दिन यहां तनाव का माहौल रहता था, लेकिन अब स्थिति सामान्य है और श्रद्धालु कभी भी दर्शन के लिए आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भोजशाला को भव्य रूप देने की दिशा में काम कर रही है।
सूर्योदय से जुटे श्रद्धालु
भोज उत्सव समिति के महामंत्री सुमित चौधरी ने बताया कि रविवार सुबह से ही हिंदू समाज और समिति के कार्यकर्ता भोजशाला पहुंच गए थे। सुबह से देवी अनुष्ठान और शुद्धिकरण का कार्य चलता रहा, जिसके बाद महाआरती का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि भोजशाला को नए स्वरूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार भी इसे पुराने वैभव के साथ संवारे जाने की बात कह चुकी है। भोजशाला में नई गाइडलाइन लागू होने के बाद पहली बार खुले माहौल में हुई पूजा-अर्चना को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।