
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले स्थित बाघमारा गोल्ड माइंस देश की चौथी सक्रिय सोना खदान बनने की ओर तेजी से बढ़ रही है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की रिपोर्ट में यहां बड़े सोना भंडार की पुष्टि होने के बाद अब वेदांता समूह ने डीप ड्रिलिंग और एक्सप्लोरेशन का काम शुरू कर दिया है। शुरुआती आकलन में यहां करीब 2700 किलो सोने का भंडार मिलने की पुष्टि हुई है और अगले दो वर्षों में यहां खनन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक बाघमारा क्षेत्र में 603 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सोने का भंडार फैला हुआ है। फिलहाल 500 मीटर तक गहराई में ड्रिलिंग की जा रही है। करीब 50 ड्रिलिंग होल्स से निकाले जा रहे सैंपल लैब भेजे जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सोना कितनी गहराई, किस गुणवत्ता और कितने बड़े क्षेत्र में मौजूद है। ड्रिलिंग के दौरान निकलने वाले पत्थरों में सोने के महीन चमकदार कण साफ दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती अनुमान से अधिक भंडार मिलने की भी संभावना है।
10 साल बाद रफ्तार पकड़ पाया प्रोजेक्ट
बाघमारा गोल्ड प्रोजेक्ट के लिए वेदांता समूह को वर्ष 2015 में लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया था, लेकिन वन स्वीकृति और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में दायर याचिकाओं के चलते परियोजना लगभग एक दशक तक अटकी रही। अब सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद एक्सप्लोरेशन कार्य तेजी से चल रहा है। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस खदान से बड़े पैमाने पर राजस्व प्राप्त होगा और इससे देश में सोने के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
देश की अर्थव्यवस्था को मिल सकती है मजबूती
भारत में हर साल लगभग 700 से 800 टन सोने की खपत होती है, जबकि देश की मौजूदा सक्रिय खदानों से मुश्किल से 1 से 1.5 टन सोना ही निकल पाता है। ऐसे में देश को अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत से अधिक सोना विदेशों से आयात करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ की यह नई खदान देश की विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी देशवासियों से सोने की खरीद सीमित करने की अपील की थी, ताकि वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ते आयात के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हो सके।
भारत की चुनिंदा गोल्ड माइंस में शामिल होगा बाघमारा
देश में वर्तमान में कर्नाटक की हट्टी गोल्ड माइंस प्रमुख सक्रिय सोना खदान है, जबकि कोलार गोल्ड फील्ड्स बंद पड़ी है। उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश और अन्य राज्यों में भी संभावित भंडारों पर काम चल रहा है, लेकिन बाघमारा परियोजना को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञ बोले- सोने के बड़े भंडार की संभावना
ड्रिलिंग कार्य से जुड़े विशेषज्ञ अभिमन्यु मंडल के अनुसार, क्षेत्र में सोने का पर्याप्त भंडार मौजूद है। फिलहाल विस्तृत डेटा तैयार करने के लिए लगातार ड्रिलिंग और सैंपलिंग का कार्य जारी है। वहीं भौमिक एवं खनिज कर्म संचालनालय के संचालक रजत बंसल ने कहा कि एक्सप्लोरेशन रिपोर्ट मिलने के बाद खनन की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रदेश और देश दोनों की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।