रायपुर । छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार को लेकर भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने एक चुप्पी भरे बयान के माध्यम से बड़े राजनैतिक इशारे किए हैं। उन्होंने विस्तार की स्वीकृति या आलोचना तो नहीं की, लेकिन अपने लहज़े से स्पष्ट संदेश दिए कि “जो कहा नहीं गया, वह सबसे ज़्यादा मायने रखता है।”
वहीं, कांग्रेस ने इस विस्तार को असंवैधानिक करार देते हुए सत्ताबल पर तीखा हमला बोला है। राज्य कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि इस विस्तार के पीछे मुख्यमंत्री का अपना निर्णय नहीं, बल्कि बाहरी दबाव—विशेष करके RSS का प्रभाव था। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं जैसे अजय चंद्राकर, धरमलाल कौशिक आदि को नजरअंदाज़ किया गया है, उन्हें मार्गदर्शक मंडल में धकेल दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विस्तार की कानूनी वैधता पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने 2003 के एक कानून का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंत्रिमंडल का आकार कुल सदस्यों का 15% से अधिक नहीं हो सकता—जिसके अनुसार अधिकतम 13 मंत्री हो सकते हैं। लेकिन वर्तमान विस्तार के बाद यह संख्या 14 तक पहुँच गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस विस्तार की मंजूरी की पुष्टि करने को कहा और यदि अनुमति नहीं मिली है, तो इसे “असंवैधानिक” करार दिया।
कुल मिलाकर, इस विवाद ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है—जहां एक ओर अजय चंद्राकर का निवांत लेकिन शक्तिशाली बयान चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस द्वारा उठाया गया असंवैधानिकता का सवाल सत्ता में बैठे लोगों की कानूनी और नैतिक मजबूती पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।