“बादाम से बढ़ी याददाश्त या गई नौकरी? हाउसिंग बोर्ड के ‘बादाम कांड’ में दो अफसरों पर गिरी गाज”

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों चर्चित “बादाम कांड” ने सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रायपुर से जुड़े इस मामले की गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है, जहां एक युवक के अनोखे विरोध ने न सिर्फ प्रशासन को झकझोर दिया, बल्कि दो अधिकारियों की छुट्टी भी करा दी।
मामला छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड से जुड़ा है, जहां बिलासपुर निवासी तोरण साहू पिछले एक साल से अपने मकान के नामांतरण के लिए दर-दर भटक रहे थे। उन्होंने 17 मार्च 2025 को अभिलाषा परिसर स्थित मकान के नामांतरण के लिए आवेदन दिया था, लेकिन तय समयसीमा में काम पूरा नहीं हुआ। आरोप है कि हर बार उन्हें “फाइल नहीं मिल रही” जैसे बहाने देकर टाल दिया जाता रहा। लगातार हो रही अनदेखी से परेशान होकर 17 अप्रैल को तोरण साहू ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। वे बादाम लेकर कार्यालय पहुंचे और वरिष्ठ सहायक की टेबल पर फेंकते हुए तंज कसा—“मैडम, बादाम खाने से याददाश्त तेज होती है, इसे खा लीजिए, शायद आपको मेरी फाइल याद आ जाए।” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया।

वीडियो के वायरल होते ही लोगों ने इसे सरकारी लापरवाही पर करारा व्यंग्य बताया। वहीं संबंधित अधिकारी ने अपनी छवि खराब होने का आरोप लगाते हुए युवक के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई। मामला जब छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त अवनीश शरण के संज्ञान में पहुंचा, तो उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नामांतरण प्रक्रिया नवंबर 2025 में ही पूरी हो चुकी थी, लेकिन फाइल को करीब पांच महीने तक दबाकर रखा गया और आवेदक को गुमराह किया जाता रहा।जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए दो संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरा दी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में व्याप्त लापरवाही और जवाबदेही के अभाव को उजागर कर दिया है। अब “बादाम कांड” प्रदेश में सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है, जहां एक आम नागरिक के अनोखे विरोध ने सिस्टम की नींद तोड़ दी और यह संदेश भी दे दिया कि कभी-कभी व्यंग्य भी बड़े बदलाव की वजह बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *