जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि बस्तर के पांच गांवों को नक्सलमुक्त घोषित करने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। इन गांवों में कभी नक्सल दहशत का माहौल था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और शांति का वातावरण है। गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि जैसे ही ये गांव नक्सलमुक्त घोषित होंगे, वहां विकास कार्यों के लिए प्रत्येक गांव को 1-1 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा, “अब बस्तर बदल रहा है, यहां बम धमाकों की गूंज नहीं बल्कि शांति महसूस की जा सकती है।” गृहमंत्री विजय शर्मा बीजापुर जिले के कुटरू गांव पहुंचे, जहां उन्होंने ‘नियद नेल्लानार’ योजना के अंतर्गत पंचायतों के विकास को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों के साथ बैठक की। बैठक में बीजापुर जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए ग्रामीण जनप्रतिनिधि, गायता, सिरहा, पुजारी और बैगा समाज के प्रमुख शामिल हुए।
हिंसा के साथ विकास संभव नहीं
बैठक को संबोधित करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि हिंसा के साथ विकास कभी संभव नहीं रहा है। सरकार का उद्देश्य बस्तर के हर गांव में शांति और खुशहाली लाना है। इसके लिए शासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्थायी शांति तभी संभव है, जब माओवादी विचारधारा के प्रभाव में भटके युवा मुख्यधारा में लौटें, पुनर्वास का रास्ता अपनाएं और गांव व देश के विकास में सहभागी बनें।
नक्सलमुक्ति की कगार पर ये गांव
गृहमंत्री ने बताया कि केतुलनार पेठा, मंगापेठा, रानी बोली, अंबेली और दरभा गांव नक्सलमुक्ति की कगार पर हैं। इन गांवों को ‘इलवंद गांव’ के रूप में विकसित करने के लिए नक्सलमुक्त घोषित किए जाने का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। नक्सलमुक्त घोषित होते ही इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 1-1 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी।
सुकमा में मिल चुका है उदाहरण
गौरतलब है कि इससे पहले सुकमा जिले के बड़ेसट्टी गांव को भी नक्सलमुक्त गांव घोषित किया जा चुका है। पुलिस और प्रशासन के अनुसार वहां नक्सली गतिविधियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। नक्सलमुक्त घोषित होने के बाद गांव के विकास के लिए 1 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी।
गृहमंत्री ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में बस्तर के और भी गांव नक्सलमुक्त होंगे और क्षेत्र विकास व शांति का नया उदाहरण बनेगा।