कांग्रेस के 41 जिलाध्यक्षों में 14 जिलों पर भूपेश कैंप का दबदबा, बैज–महंत–देवेन्द्र के गुटों का भी मजबूत प्रभाव

कांग्रेस के 41 जिलाध्यक्षों  में 14 जिलों पर भूपेश कैंप का दबदबा, बैज–महंत–देवेन्द्र के गुटों का भी मजबूत प्रभाव

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत 41 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति कर दी है। नई सूची में कई जिलों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं—कुछ चेहरों की अदला-बदली, कुछ जिलों में मजबूत गुटों की एंट्री और कई जगह स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पुराने चेहरों पर फिर भरोसा जताया गया है। इस सूची का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें किस बड़े नेता के कितने करीबी जिलाध्यक्ष पद तक पहुंचने में सफल हुए हैं। चेहरों के विश्लेषण से साफ हो गया है कि संगठन में किसकी पकड़ कितनी गहरी है और कौन-सा कैंप कितनी प्रभावशाली स्थिति में है।

भूपेश बघेल कैंप का सबसे बड़ा दबदबा – 14 जिलाध्यक्ष

जारी सूची में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रभाव की स्पष्ट छाप नजर आती है। कुल 41 में से 14 जिलाध्यक्ष बघेल कैंप से जुड़े बताए जाते हैं—यह किसी भी नेता का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इनमें बालोद, बलौदाबाजार, भिलाई, दुर्ग, महासमुंद, कोंडागांव, खैरागढ़ आदि जिले शामिल हैं। कई पदाधिकारियों को दोबारा मौका दिया गया है, जो बताता है कि बघेल का फील्ड नेटवर्क अभी भी सबसे मजबूत और प्रभावी है। जशपुर के यूडी मिंज और महासमुंद के द्वारकाधीश यादव जैसे नाम बघेल के विश्वस्त माने जाते रहे हैं। सूची जारी होने के बाद कई जिलाध्यक्षों और विधायकों ने बघेल से मुलाकात कर संगठनात्मक दिशा पर चर्चा भी की।

दीपक बैज कैंप – बस्तर और बिलासपुर संभाग में मजबूत पकड़

पीसीसी चीफ दीपक बैज का प्रभाव भी इस नई नियुक्ति सूची में मजबूती से उभरकर आया है।उनकी सीधी पसंद वाले 4 जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं, साथ ही एक नाम ऐसा है जो बैज और देवेन्द्र यादव, दोनों कैंपों से जुड़ा माना जाता है। बैज का सबसे मजबूत प्रभाव बस्तर रेंज और बिलासपुर संभाग में दिखाई देता है। बिलासपुर सिटी के सिद्धांशु मिश्रा बैज और देवेन्द्र यादव के साझा करीबी माने जाते हैं—यह बैज की बैलेंस्ड संगठनात्मक रणनीति को दर्शाता है। नए जिलाध्यक्षों ने सूची जारी होने के बाद बैज से भी मुलाकात कर आगे की संगठनात्मक योजनाओं पर चर्चा की।

महंत कैंप – 5 जिलों में पकड़ बरकरार

नेता प्रतिपक्ष और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत का प्रभाव भी सूची में साफ दिखता है। राज्य के कोरिया, MCCB, सक्ती, GPM और जांजगीर जैसे जिलों में महंत गुट के नेताओं को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। बिलासपुर संभाग में महंत की संगठनात्मक पकड़ पहले से मजबूत मानी जाती है और नई सूची भी उसी प्रभाव को दोहराती है।

टीएस सिंहदेव – 2 जिलों में प्रभाव, सरगुजा में पकड़ बरकरार

स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव के गुट को दो जिलाध्यक्ष पद मिले हैं—सरगुजा और मुंगेली।
सरगुजा में नियुक्त बालकृष्ण पाठक सिंहदेव के बेहद करीबी और सबसे वरिष्ठ जिलाध्यक्षों में शामिल हैं। मुंगेली के घनश्याम वर्मा देवेन्द्र यादव के भी करीबी माने जाते हैं, जिससे स्थानीय समीकरण दिलचस्प बनते हैं।

उमेश पटेल और जयसिंह अग्रवाल का दबदबा

पूर्व मंत्री उमेश पटेल के करीबी रायगढ़ सिटी और रायगढ़ ग्रामीण के 2 जिलाध्यक्ष चुने गए। शाखा यादव और नागेंद्र नेगी दोनों लंबे समय से पटेल के साथ जुड़े रहे हैं और रायगढ़ की राजनीति में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।वहीं जयसिंह अग्रवाल कैंप से कोरबा शहर और कोरबा ग्रामीण 2 नाम सामने आए, मुकेश राठौर और मनोज चौहान। कोरबा कांग्रेस में अग्रवाल का प्रभाव पहले भी निर्णायक रहा है, और यह सूची उसे कंफर्म करती है।मो. अकबर, कर्मा परिवार और संगठनपूर्व मंत्री मो. अकबर के करीबी नवीन जायसवाल को कवर्धा में मौका मिला है। दंतेवाड़ा में सलीम राजा उस्मानी जिला अध्यक्ष बनाए गए हैं, जो लंबे समय से दंतेवाड़ा में कर्मा परिवार के करीबी माने जाते रहे हैं।इसी तरह बेमेतरा में पूर्व विधायक आशीष छाबड़ा, जो पहले से ही जिला अध्यक्ष थे, उन्हें रिपिट किया गया है। छाबड़ा पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू के बेहद करीबी माने जाते हैं।

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