
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग (PWD) की ई-टेंडरिंग व्यवस्था में 1 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। विभाग की सभी नई निविदाओं का सृजन एवं प्रकाशन अब GePNIC पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने से पहले ठेकेदारों को पोर्टल की प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं से परिचित कराने के लिए 22 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रशिक्षण प्रत्येक कार्य दिवस दोपहर 12 बजे से 1 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होगा। प्रशिक्षण की तकनीकी व्यवस्था चिप्स द्वारा की जाएगी। विभाग का उद्देश्य नई ई-प्रोक्योरमेंट व्यवस्था लागू होने के बाद ठेकेदारों को निविदा प्रक्रिया में तकनीकी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए पहले से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है।
ठेकेदार संगठनों से सहयोग का आग्रह
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय ने छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर यूनियन तथा बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया, रायपुर के पदाधिकारियों को पत्र भेजा है। विभाग ने दोनों संगठनों से अपने स्तर पर ठेकेदारों को GePNIC पोर्टल की नई व्यवस्था की जानकारी देने तथा प्रशिक्षण में उनकी सहभागिता सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है।
GePNIC पर पंजीयन होगा जरूरी
नई व्यवस्था के तहत लोक निर्माण विभाग के टेंडरों में भाग लेने वाले ठेकेदारों के लिए GePNIC पोर्टल पर नामांकन आवश्यक होगा। 1 अक्टूबर से विभाग की नई निविदाएं इसी पोर्टल पर तैयार और प्रकाशित की जाएंगी। ऐसे में ठेकेदारों के लिए नई प्रणाली के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया समय रहते पूरी करना महत्वपूर्ण होगा।
22 सितंबर से शुरू होगी प्रशिक्षण की प्रक्रिया
विभाग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 22 सितंबर से 30 सितंबर तक प्रतिदिन एक घंटे के प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से GePNIC के माध्यम से नई निविदा व्यवस्था लागू हो जाएगी।
ठेकेदारों के लिए महत्वपूर्ण तारीखें:
22 सितंबर — प्रशिक्षण की शुरुआत
30 सितंबर — प्रशिक्षण का अंतिम दिन
1 अक्टूबर — GePNIC पर नई निविदा व्यवस्था लागू
समय — दोपहर 12 से 1 बजे तक
माध्यम — वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
सवाल यह भी—क्या नई व्यवस्था से ई-टेंडरिंग और आसान होगी?
PWD की नई व्यवस्था लागू होने के साथ ठेकेदारों के लिए पोर्टल की जानकारी और तकनीकी तैयारी महत्वपूर्ण हो गई है। विभाग द्वारा लागू किए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम को इसी तैयारी की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अब 1 अक्टूबर के बाद GePNIC आधारित व्यवस्था में निविदा प्रक्रिया किस तरह संचालित होती है और ठेकेदारों को इसका कितना व्यावहारिक लाभ मिलता है, यह देखने वाली बात होगी।