
सीबीआई जांच की मांग खारिज, कोर्ट ने कहा- दोषियों पर कार्रवाई हो, योग्य अभ्यर्थियों को नहीं मिले सजा
बिलासपुर, 7 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में चल रही आरक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने भर्ती प्रक्रिया रद्द करने की मांग खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कुछ अभ्यर्थियों पर अनियमितता के आरोप लगने से पूरी भर्ती निरस्त नहीं की जा सकती। हालांकि, भर्ती में संदिग्ध पाए गए 129 अभ्यर्थियों की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बिलासपुर भर्ती केंद्र में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के दौरान लंबी कूद, गोला फेंक और दौड़ जैसी स्पर्धाओं में अनियमितताएं हुईं। साथ ही पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर सीबीआई जांच कराने की मांग की गई थी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि अनियमितता करने वाले अभ्यर्थियों की पहचान हो चुकी है, तो कार्रवाई केवल उन्हीं के खिलाफ की जानी चाहिए। कुछ लोगों की गलती की सजा अन्य योग्य अभ्यर्थियों को नहीं दी जा सकती। इसलिए पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना न्यायसंगत नहीं होगा।
हाई कोर्ट ने सीबीआई जांच की मांग भी अस्वीकार कर दी। अदालत ने कहा कि यह मामला इतने व्यापक स्तर के भ्रष्टाचार का नहीं है कि इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए। विभाग पहले ही संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान कर चुका है।
कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक द्वारा चिन्हित 129 संदिग्ध अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित उम्मीदवारों की जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराने के निर्देश दिए हैं। यदि जांच में कोई अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है, तो उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद नियमों के अनुसार उसकी नियुक्ति रद्द करने सहित आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। हाई कोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ की आरक्षक भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी, जबकि संदिग्ध अभ्यर्थियों के खिलाफ अलग से जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।