
दुर्ग में सातवें दिन भी जारी रहा धरना, प्रदेशभर से पहुंचे अतिथि शिक्षक बोले— ‘अब आर-पार की लड़ाई‘
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में नियमितीकरण की मांग को लेकर अतिथि शिक्षकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। दुर्ग में चल रहा धरना-प्रदर्शन मंगलवार को सातवें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने सिर पर काली पट्टी बांधकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और जल्द नियमितीकरण का निर्णय लेने की मांग की। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में महिला अतिथि शिक्षक भी मौजूद रहीं। कई शिक्षिकाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को साथ लेकर प्रदर्शन में शामिल हुईं, जबकि कुछ गर्भवती शिक्षिकाओं ने भी आंदोलन में भाग लेकर अपनी मांगों को बुलंद किया। कई अतिथि शिक्षकों ने बताया कि वे अपनी गर्भवती पत्नी को घर पर छोड़कर आंदोलन में पहुंचे हैं, क्योंकि उनके सामने रोजगार और परिवार दोनों की चिंता खड़ी हो गई है।
आंदोलन में कांकेर, कोरिया, कोंडागांव, बस्तर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) समेत प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था में अपनी सेवाएं देने के बावजूद उन्हें आज तक स्थायी रोजगार नहीं मिला है। अस्थायी व्यवस्था में काम करते-करते उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है और परिवार का पालन-पोषण करना भी मुश्किल होता जा रहा है। धरना दे रहे अतिथि शिक्षकों ने कहा कि अब उनके सामने “आर-पार की लड़ाई” है। उनका कहना है कि “हम कहीं के नहीं रहे हैं। गुजारा करना मुश्किल हो गया है। अब या तो सरकार हमें नियमित करे, या फिर संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।” प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। धरना स्थल पर दिनभर नारेबाजी होती रही और अतिथि शिक्षकों ने नियमितीकरण तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।