CGPSC भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CBI में दागी नहीं मिले अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता खुला-सशर्त नियुक्ति का रास्ता साफ

CGPSC भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CBI में दागी नहीं मिले अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता खुला-सशर्त नियुक्ति का रास्ता साफ

रायपुर, 8 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) राज्य सेवा परीक्षा-2021 के चयनित अभ्यर्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। इसके साथ ही उन चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है, जो CBI जांच में दागी नहीं पाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हाईकोर्ट के उस आदेश को मजबूती मिली है, जिसमें CBI जांच में किसी प्रतिकूल तथ्य या चार्जशीट के दायरे में नहीं आने वाले चयनित अभ्यर्थियों को सशर्त नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था।

171 पदों पर हुई थी भर्ती

CGPSC ने वर्ष 2021 में राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से 171 पदों पर भर्ती प्रक्रिया आयोजित की थी। इसमें डिप्टी कलेक्टर, DSP, नायब तहसीलदार, जेल अधीक्षक सहित करीब 20 विभिन्न सेवाओं के पद शामिल थे। प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के बाद 11 मई 2023 को अंतिम चयन सूची जारी की गई थी। हालांकि, चयन सूची जारी होने के बाद भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितता और भाई-भतीजावाद के आरोप लगे। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां विवादों में आ गईं।

CBI जांच के चलते अटकी थीं नियुक्तियां

भर्ती प्रक्रिया को लेकर शिकायतों और आरोपों के बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई। जांच शुरू होने के बाद कई चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां प्रभावित हुईं। खासकर डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चयनित कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों राणा विजय, अमित कुमार भारद्वाज, प्रज्ञा नायक सहित अन्य ने नियुक्ति की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हाईकोर्ट ने दिया था सशर्त नियुक्ति का आदेश

हाईकोर्ट ने CBI की जांच प्रगति रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद माना कि पूरी चयन सूची में शामिल सभी अभ्यर्थियों को एक समान दोषी नहीं माना जा सकता। CBI की जांच में जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ कोई ठोस प्रतिकूल सामग्री सामने नहीं आई थी, उन्हें केवल भर्ती प्रक्रिया पर लगे आरोपों के आधार पर नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को CBI की चार्जशीट के दायरे से बाहर चयनित अभ्यर्थियों को 60 दिनों के भीतर सशर्त नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया था। नियुक्ति में यह शर्त रखी गई थी कि भविष्य में जांच के दौरान किसी अभ्यर्थी के खिलाफ प्रतिकूल तथ्य सामने आने पर उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।

डिवीजन बेंच में भी सरकार को नहीं मिली राहत

सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सरकार की अपील खारिज करते हुए सिंगल बेंच के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने SLP की खारिज

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष हुई। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए राज्य सरकार की SLP खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद CBI जांच में दागी नहीं पाए गए CGPSC 2021 के चयनित अभ्यर्थियों के लिए सशर्त नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।

सभी 171 अभ्यर्थियों को स्वतः नियुक्ति नहीं

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अर्थ यह नहीं है कि CGPSC 2021 के सभी 171 चयनित अभ्यर्थियों को स्वतः नियुक्ति मिल जाएगी। इसका लाभ मुख्य रूप से उन अभ्यर्थियों को मिलेगा, जो CBI जांच में किसी प्रतिकूल तथ्य या चार्जशीट के दायरे में नहीं हैं। वहीं, जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ CBI जांच में गंभीर आरोप या चार्जशीट का मामला है, उनके संबंध में हाईकोर्ट के आदेश में निर्धारित शर्तें लागू रहेंगी।

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