
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन की बैठक में स्कूल शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन करते हुए आठ महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यालयों की प्रशासनिक समस्याओं के समाधान और प्राचार्यों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार एवं स्कूल शिक्षा विभाग से आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई। प्रांतीय कोषाध्यक्ष चमेली वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्राचार्यों ने कक्षा 5वीं और 8वीं में लागू नो-डिटेंशन पॉलिसी समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई। उनका कहना था कि बिना अनुत्तीर्ण नीति के कारण विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और पढ़ाई के प्रति गंभीरता कम हो रही है। बैठक में स्कूलों में छात्र संख्या के अनुरूप स्टाफ सेटअप के पुनरीक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। प्राचार्यों का कहना था कि वर्ष 2008 के बाद से स्टाफ संरचना में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जबकि विद्यार्थियों की संख्या और शैक्षणिक आवश्यकताएं लगातार बढ़ती गई हैं।
फेडरेशन ने RMSA विद्यालयों में लिपिक, भृत्य, चौकीदार और स्वीपर के पद स्वीकृत करने की मांग की। वहीं स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में प्राचार्यों को आकस्मिक मद से 20 हजार रुपए तक खर्च करने की पूर्व व्यवस्था बहाल करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। बैठक में तिमाही, छमाही और स्थानीय परीक्षाओं के आयोजन का अधिकार दोबारा प्राचार्यों को सौंपने की मांग की गई। साथ ही मिशन उत्कर्ष की समीक्षा बैठकों में अधिकारियों से सहयोगात्मक रवैया अपनाने और विद्यालयों की समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर ध्यान देने का आग्रह किया गया। प्राचार्य फेडरेशन ने सभी स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में विज्ञान के साथ कला एवं वाणिज्य संकाय शुरू करने की मांग भी रखी, ताकि विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही विषय चयन का अवसर मिल सके।
बैठक में कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के दिन ही PPO (पेंशन भुगतान आदेश) जारी करने और सभी देयकों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भुगतान और आवश्यक दस्तावेजों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। बैठक में जिला अध्यक्ष डॉ. भारती अग्रवाल, प्रमुख सलाहकार अनुराग ओझा, संयुक्त सचिव आई.जे. विंद, सरिता यासरे, रविशंकर होता, डॉ. वंदना अग्रवाल, शीला तुलानी, फाखरा खानम दानी, पापिया बनर्जी, रजनी मिंज, रोमिला एक्का और हीरालाल वैष्णव सहित बड़ी संख्या में प्राचार्य उपस्थित रहे। फेडरेशन ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से इन प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि मांगों के क्रियान्वयन से विद्यालयों का संचालन अधिक प्रभावी होगा और प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को नई दिशा मिलेगी।