बिजली दरों में बढ़ोतरी के बीच बड़ी राहत, 41 लाख उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा खास असर; किसानों को भी मिलेगी पूरी सब्सिडी

बिजली दरों में बढ़ोतरी के बीच बड़ी राहत, 41 लाख उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा खास असर; किसानों को भी मिलेगी पूरी सब्सिडी

रायपुर, 17 जून 2026। छत्तीसगढ़ में विद्युत टैरिफ में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने आम उपभोक्ताओं, किसानों और गरीब परिवारों को राहत देने के लिए कई योजनाओं का सहारा लिया है। सरकार का दावा है कि बिजली दरों में बढ़ोतरी का असर प्रदेश के अधिकांश उपभोक्ताओं पर बेहद सीमित रहेगा। जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब 51 लाख घरेलू उपभोक्ता हैं, जिनमें से 14.5 लाख बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक बिजली निःशुल्क दी जा रही है। वहीं 26.5 लाख उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर 50 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। इन योजनाओं के चलते लगभग 41 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर बिजली दर वृद्धि का प्रभाव शून्य से लेकर अधिकतम 3.65 प्रतिशत तक ही रहने का अनुमान है।

किसानों के लिए भी राहत बरकरार रखी गई है। कृषि उपभोक्ताओं पर ऊर्जा प्रभार में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, लेकिन इसकी भरपाई राज्य सरकार सब्सिडी के माध्यम से करेगी। इसके कारण 8.65 लाख कृषि उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। सिंचाई पंपों के स्थायी शुल्क में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार की पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक करीब 66 हजार उपभोक्ताओं ने सौर ऊर्जा अपनाई है, जिनमें से 16 हजार परिवारों का बिजली बिल शून्य हो चुका है। वहीं 89 हजार से अधिक घरों में सोलर संयंत्र स्थापना का कार्य जारी है।

मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना के तहत भी उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी जा रही है। इस योजना से अब तक 1328 करोड़ रुपये के बकाया बिलों का समाधान किया जा चुका है, जबकि 749 करोड़ रुपये की राहत उपभोक्ताओं को मिली है। सरकार ने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्टील उद्योगों को मिलने वाली 25 प्रतिशत छूट को भी जारी रखा है। साथ ही बस्तर और सरगुजा के आदिवासी क्षेत्रों के छात्रावासों को घरेलू श्रेणी में शामिल कर बिजली खर्च कम करने की दिशा में कदम उठाया गया है। राज्य सरकार का कहना है कि बढ़ती उत्पादन लागत और ऊर्जा अधोसंरचना के विस्तार की जरूरतों को देखते हुए टैरिफ संशोधन आवश्यक था, लेकिन राहत योजनाओं और सब्सिडी के जरिए आम उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव न्यूनतम रखने का प्रयास किया गया है।

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