
रायपुर। छत्तीसगढ़ में दिसंबर में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। दुर्ग जिले के भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरौदा के साथ रायपुर के बिरगांव नगर निगम में चुनाव प्रस्तावित हैं। फिलहाल इन चारों नगर निगमों में कांग्रेस का कब्जा है। ऐसे में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद इन चुनावों को दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है। दोनों दलों के संभावित प्रत्याशियों ने टिकट की दावेदारी के लिए नेताओं से संपर्क बढ़ा दिया है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिला कलेक्टरों ने वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद राजनीतिक दलों के कार्यालयों में दावेदारों की भीड़ और बढ़ने की संभावना है।
महापौर और पार्षद के लिए अलग-अलग मतदान
2021 में हुए पिछले नगरीय निकाय चुनाव के दौरान महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से हुआ था। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और पार्टी ने सभी नगर निगमों में महापौर बनाने में सफलता हासिल की थी। 2023 में भाजपा की सरकार बनने के बाद महापौर का चुनाव फिर से अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने का निर्णय लिया गया। इसके तहत इस बार महापौर और पार्षद पद के लिए अलग-अलग मतदान होगा। इससे राजनीतिक दलों को पार्षदों के साथ महापौर पद के लिए भी मजबूत चेहरे उतारने होंगे।
दुर्ग में भूपेश बघेल और ताम्रध्वज साहू की साख भी दांव पर
चार में से तीन नगर निगम दुर्ग जिले में हैं। दुर्ग कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू का गृह जिला है। ऐसे में भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरौदा के परिणाम दोनों वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के लिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। भाजपा के लिए भी ये चुनाव सरकार बनने के बाद शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की परीक्षा होंगे।
बिरगांव: पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित
40 वार्ड वाले बिरगांव नगर निगम में फिलहाल कांग्रेस के नंदलाल देवांगन महापौर हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस के 19 पार्षद जीते थे। बाद में दो निर्दलीय पार्षदों के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी ने बहुमत हासिल कर महापौर पद पर कब्जा किया। इस बार बिरगांव महापौर पद अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण की स्थिति सामने आने के साथ ही दोनों दलों में महिला दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है।
रिसाली: एससी महिला सीट पर मुकाबला
26 दिसंबर 2019 को भिलाई नगर निगम से अलग होकर अस्तित्व में आए रिसाली नगर निगम में कांग्रेस की शशि सिन्हा महापौर हैं। 40 वार्ड वाले निगम में कांग्रेस ने 21 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया था। रिसाली क्षेत्र पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू के प्रभाव वाले इलाके के रूप में भी जाना जाता है। यह दुर्ग ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में आता है, जहां से भाजपा के ललित चंद्राकर विधायक हैं। इस बार महापौर पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित है।
भिलाई: 70 वार्डों में होगा बड़ा मुकाबला
भिलाई नगर निगम चारों निकायों में सबसे बड़ा है। यहां कुल 70 वार्ड हैं। फिलहाल कांग्रेस के नीरज पाल महापौर हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 37 वार्डों में जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा के 24 पार्षद चुने गए थे। भिलाई नगर निगम का क्षेत्र भिलाई नगर और वैशाली नगर विधानसभा सीटों में आता है। भिलाई नगर से कांग्रेस के देवेंद्र यादव विधायक हैं, जबकि वैशाली नगर से भाजपा के रिकेश सेन विधायक हैं। इसलिए यहां विधानसभा स्तर के राजनीतिक समीकरणों का असर भी निकाय चुनाव पर पड़ सकता है।
चरौदा: भूपेश बघेल के गृह क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस की परीक्षा
40 वार्डों वाला भिलाई-चरौदा नगर निगम भी हाईप्रोफाइल माना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का निवास इसी क्षेत्र में है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने 19 वार्ड जीते थे और पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी। बाद में दो निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़कर कांग्रेस ने बहुमत का आंकड़ा पूरा किया और महापौर बनाने में सफल रही। इस बार चरौदा में भी महापौर पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। ऐसे में दोनों दलों के लिए सही उम्मीदवार का चयन और वार्ड स्तर पर मजबूत रणनीति निर्णायक हो सकती है। दिसंबर में होने वाले इन चार नगर निगमों के चुनाव में कांग्रेस अपने कब्जे वाले शहरी निकायों को बचाने की कोशिश करेगी, जबकि भाजपा सत्ता में आने के बाद पहली बार इन निगमों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी। आरक्षण की अंतिम तस्वीर और प्रत्याशियों की घोषणा के बाद चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है।