“बोरे-बासी में भी भ्रष्टाचार, कुछ तो छोड़ देते कका!” — राधिका खेड़ा का हमला, भूपेश बोले: “15 साल के सारे शासकीय कार्यक्रमों की जांच करवा लो”

रायपुर। कांग्रेस की पिछली सरकार द्वारा मनाए गए बोरे-बासी दिवस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गौरतलब है दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 1 मई 2023 को राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित महज 5 घंटे के कार्यक्रम में 8.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए। रिपोर्ट में खर्च को लेकर गंभीर अनियमितताओं का जिक्र किया गया है, जिस पर अब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को घेरा है।

बीजेपी की राष्ट्रीय प्रवक्ता राधिका खेड़ा ने इस आयोजन को “भ्रष्टाचार का बोरे-बासी” करार देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर तीखा तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा,
“वाह भूपेश कका… बोरे-बासी में भी भ्रष्टाचार! कुछ तो छोड़ देते। कुर्सी बचाने के चक्कर में दीदी की थाली सजाने के लिए छत्तीसगढ़ महतारी को ही बेच दिया?”

खेड़ा ने आरोप लगाया कि आयोजन में फर्जी बिलिंग के ज़रिए भारी रकम खर्च दिखाई गई। उदाहरण के तौर पर 1500 रुपये की वीआईपी थाली, 18 रुपये में 8 रुपये की पानी की बोतल, 6 डोम की जगह 4 डोम बनाए गए, लेकिन पूरा बिल लगाया गया। मजदूरों की संख्या 50 हजार दिखाई गई, जबकि हकीकत में महज 15 हजार पहुंचे थे।

उन्होंने कहा,
“कका ने बोरे-बासी को छत्तीसगढ़ की संस्कृति नहीं, लूट का साधन बनाया।”

बघेल का पलटवार

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि
“हमारे 5 साल के कार्यकाल ही नहीं, रमन सिंह के 15 साल और बीजेपी के वर्तमान कार्यक्रमों की भी जांच होनी चाहिए।”
उन्होंने रमन सिंह की विकास यात्रा और बीजेपी सरकार के शपथ कार्यक्रमों में खर्च की गई राशि की भी जांच की मांग की।

क्या था बोरे-बासी दिवस?

यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देने के नाम पर शुरू किया गया था। पके चावल को पानी में भिगोकर खाया जाने वाला “बोरे-बासी” श्रमिकों और ग्रामीणों का लोकप्रिय भोजन है। कांग्रेस सरकार ने इसे सांस्कृतिक पहचान के रूप में पेश करते हुए 1 मई को बोरे-बासी दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया था।

2023 में इस दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में, दस्तावेजों के अनुसार, 1.10 करोड़ रुपये में 6 विशाल डोम, 75 लाख रुपये का भोजन, 27 लाख का पानी, 80 लाख की टोपी, और 150 मेहमानों के लिए 10 हजार रुपये के मोमेंटो जैसी वस्तुओं पर खर्च दर्शाया गया। लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी से साफ हुआ कि आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और खर्च के नाम पर भारी गड़बड़ी हुई।

मामले की पड़ताल ज़रूरी

इस पूरे आयोजन की जिम्मेदारी तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त अनिल कुजूर को सौंपी गई थी, जिन पर अनाप-शनाप बिल लगाकर करोड़ों रुपये की गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं। मामले के तूल पकड़ने के बाद इस पर व्यापक जांच की मांग उठ रही है।

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